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राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ने राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के पारंपरिक ढांचे को पूरी तरह से बदलने की तैयारी शुरू कर दी है [1]. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप, अब छात्रों को रटंत शिक्षा और सीमित विकल्पों के दायरे से बाहर निकाला जाएगा [1]. इस बड़े School Education Reform के तहत बोर्ड ने कक्षा 9वीं और 11वीं के लिए नई किताबें (RBSE New Books) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है [1].
इस नए बदलाव का सबसे बड़ा असर विद्यार्थियों के विषय चयन की स्वतंत्रता पर पड़ेगा [1]. अब छात्रों को पारंपरिक संकाय (Streams) जैसे आर्ट्स, कॉमर्स या साइंस के बंधनों में नहीं बंधना होगा, बल्कि वे अपनी पसंद के अनुसार विषयों का संयोजन चुन सकेंगे [1]. आइए जानते हैं कि इस नए Rajasthan Board Syllabus और शिक्षा ढांचे में क्या-क्या महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहे हैं [1].
वर्तमान व्यवस्था में कक्षा 11वीं में प्रवेश लेते ही छात्रों को साइंस, कॉमर्स या आर्ट्स में से किसी एक संकाय (Stream) को चुनना पड़ता था [1]। इसके बाद वे चाहकर भी दूसरे संकाय का कोई विषय नहीं पढ़ पाते थे [1]। उदाहरण के लिए, विज्ञान का छात्र इतिहास नहीं पढ़ सकता था और आर्ट्स का छात्र भौतिक विज्ञान नहीं ले सकता था।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत इस पारंपरिक संकाय व्यवस्था को समाप्त कर Class 11 Subject Group प्रणाली लागू की जा रही है [1]।
मुख्य बदलाव: अब छात्र एक भाषा समूह के साथ अन्य विभिन्न विषय समूहों से अपनी पसंद के विषयों का चयन कर सकेंगे [1]। इससे अलग-अलग और विविध विषयों को एक साथ मिलाकर पढ़ने की गुंजाइश काफी बढ़ जाएगी [1]। यह पूरी व्यवस्था सीबीएसई (CBSE) की तर्ज पर तैयार की जा रही है [1]।
कक्षा 9वीं के स्तर पर ही छात्रों को व्यावहारिक और व्यावसायिक ज्ञान देने के लिए बोर्ड ने विशेष तैयारी की है [1]। RBSE Class 9 Vocational Subjects को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा रहा है ताकि छात्र अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ हुनरमंद भी बन सकें [1]।
कक्षा 9वीं में विषय समूहों के आधार पर मिलने वाले विकल्पों में निम्नलिखित क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा [1]:
इन वोकेशनल विषयों के शामिल होने से छात्र अपनी रुचि के अनुसार शुरुआती स्तर पर ही तकनीकी और व्यावहारिक कौशल सीख सकेंगे [1]।
इस नए बदलाव में स्थानीय भाषाई जरूरतों और संस्कृति का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है [1]। नए पाठ्यक्रम में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं के साथ-साथ राजस्थानी भाषा को भी एक विकल्प के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है [1]। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा और क्षेत्रीय संस्कृति से जोड़े रखना है [1]।
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में आने वाले समय में होने वाले बदलावों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है [1]:
| मापदंड | पुरानी व्यवस्था (Current System) | नई व्यवस्था (Proposed NEP 2020 System) |
|---|---|---|
| कक्षा 11वीं में विषय चयन | आर्ट्स, कॉमर्स या साइंस संकाय में से कोई एक चुनना अनिवार्य था [1]। | संकाय व्यवस्था समाप्त; विषय समूहों से मिक्स विषय चुनने की आजादी [1]। |
| कक्षा 9वीं का पाठ्यक्रम | केवल पारंपरिक अकादमिक विषय [1]। | अकादमिक विषयों के साथ वोकेशनल व कौशल-आधारित विषय [1]। |
| कक्षा 9वीं में वोकेशनल विकल्प | उपलब्ध नहीं थे [1]। | अनाज उत्पादन, ऑटोमोबाइल जैसे व्यावहारिक विषय शामिल [1]। |
| भाषाई विकल्प | केवल मान्यता प्राप्त मुख्य भाषाएं [1]। | राजस्थानी भाषा को भी विकल्प के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव [1]। |
| पुस्तकों का आधार | राज्य का पुराना पाठ्यक्रम [1]। | NEP 2020 और NCERT की पुस्तकों के अध्ययन पर आधारित नया ढांचा [1]। |
आरबीएसई (RBSE) के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ के अनुसार, राज्य सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद नई पुस्तकों को तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है [1]। नई किताबों को तैयार करने के लिए एनसीईआरटी (NCERT) की पुस्तकों का गहन अध्ययन किया जा रहा है, ताकि उपयोगी सामग्री को राजस्थान की स्थानीय आवश्यकताओं और संस्कृति के अनुरूप ढाला जा सके [1]।
नई किताबों को तैयार करने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी [1]:
इस पूरी प्रक्रिया में दूसरे राज्यों के शिक्षा विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है ताकि राजस्थान के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके [1]।
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा उठाए जा रहे ये कदम राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को एक नई दिशा देंगे [1]। NEP 2020 Rajasthan के तहत होने वाले इन सुधारों से न केवल छात्रों पर से पढ़ाई का मानसिक दबाव कम होगा, बल्कि वे अपनी रुचि के अनुसार बहु-विषयक (Multidisciplinary) शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे [1]। वोकेशनल कोर्स और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करने से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद छात्रों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे [1]।
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