Apps and sites we build and maintain alongside this one.
Automated video production and channel management tools.
Track, issue, and manage books with a simple mobile app.
Score and review handwritten answer sheets on the go.
A study companion app built for students.
Read the latest blogs and news updates.
Create presentations quickly for online classes.

राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों और कोचिंग इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के लिए इस समय एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। जयपुर के गोपालपुरा बाईपास पर हाल ही में आयोजित राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट एसोसिएशन की बैठक में राज्य के कोचिंग उद्योग पर मंडराते गंभीर संकट को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। कोचिंग संचालकों का आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा बिना किसी पूर्व परामर्श या व्यावहारिक चर्चा के नए बिल्डिंग बायलॉज (Building Bylaws) लागू कर दिए गए हैं, जो पूरी तरह से अव्यावहारिक हैं। इस राजस्थान कोचिंग संकट के कारण अब संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे अपने संस्थानों को दूसरे राज्यों में स्थानांतरित (Migrate) करने पर मजबूर हो जाएंगे।
इस बैठक में जयपुर के अलावा सीकर, जोधपुर और कोटा जैसे प्रमुख कोचिंग हब के संचालक भी शामिल हुए। सभी ने एक सुर में सरकार की नीतियों और विकास प्राधिकरणों द्वारा की जा रही सीलिंग की कार्रवाई का विरोध किया है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की प्रवर्तन शाखा गोपालपुरा बाईपास और उसके आसपास के क्षेत्रों में संचालित कोचिंग संस्थानों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। इस कार्रवाई के तहत कई कोचिंग संस्थानों को अब तक सील किया जा चुका है।
इस संकट के समाधान और भविष्य की रणनीति तय करने के लिए राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट एसोसिएशन ने गोपालपुरा बाईपास पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। बैठक में वक्ताओं ने साफ तौर पर कहा कि नए नियम व्यावहारिक नहीं हैं और इन्हें बनाते समय स्टेकहोल्डर्स (Coaching Operators) से कोई राय-मशविरा नहीं किया गया।
मुख्य चिंता: यदि राज्य में कोचिंग संस्थानों का संचालन कठिन या पूरी तरह असंभव बना दिया गया, तो संचालकों के पास कोचिंग बंद कर दूसरे राज्यों की ओर रुख करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। इससे राजस्थान की अर्थव्यवस्था और छात्रों, दोनों को भारी नुकसान होना तय है।
कोचिंग संचालकों के विरोध का मुख्य कारण नए बिल्डिंग बायलॉज में शामिल कुछ बेहद कड़े और व्यावहारिक रूप से कठिन प्रावधान हैं। इन नियमों को 5 दिसंबर, 2025 से प्रभावी किया गया है।
एसोसिएशन के अनुसार, मुख्य रूप से निम्नलिखित दो नियमों का सबसे अधिक विरोध हो रहा है:
कोचिंग संचालकों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार की ओर से अब तक किसी भी कोचिंग संस्थान को संस्थागत पट्टा जारी नहीं किया गया है। जब सरकार के स्तर पर ही नियमों के अनुरूप पट्टे देने की कोई सुचारू व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो फिर संस्थानों को बंद करने या उन्हें सील करने की एकतरफा कार्रवाई क्यों की जा रही है?
नीचे दी गई तालिका में नए बिल्डिंग बायलॉज के प्रावधानों और कोचिंग संचालकों के पक्ष को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है:
| विषय (Topic) | नए बिल्डिंग बायलॉज के प्रावधान | कोचिंग संचालकों का पक्ष / मांग |
|---|---|---|
| न्यूनतम भूमि सीमा | कोचिंग संचालन के लिए न्यूनतम 500 वर्ग मीटर भूमि अनिवार्य। | छोटे और मध्यम स्तर के कोचिंग संस्थानों के लिए यह शर्त पूरी तरह से अव्यावहारिक है। |
| संस्थागत पट्टा | संस्थान के पास संस्थागत पट्टा (Institutional Lease) होना अनिवार्य है। | सरकार ने अभी तक किसी भी कोचिंग को पट्टा जारी नहीं किया है। पहले पट्टा देने की प्रक्रिया सरल की जाए। |
| परामर्श प्रक्रिया | बिना किसी पूर्व चर्चा या व्यावहारिक फीडबैक के नियम लागू किए गए। | नियम बनाने से पहले एसोसिएशन और संचालकों के साथ विस्तृत चर्चा की जानी चाहिए थी। |
| कार्रवाई का तरीका | नियमों का उल्लंघन होने पर सीधे सीलिंग और बंद करने की कार्रवाई। | जब तक नियमों को व्यावहारिक नहीं बनाया जाता, तब तक सीलिंग की दंडात्मक कार्रवाई पर तुरंत रोक लगे। |
राजस्थान, विशेष रूप से कोटा, जयपुर और सीकर, पूरे भारत में कोचिंग हब के रूप में जाने जाते हैं। हर साल देश भर से लाखों छात्र यहाँ NEET, JEE, UPSC, REET और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। यदि यहाँ से कोचिंग उद्योग दूसरे राज्यों (जैसे हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली या मध्य प्रदेश) की ओर पलायन करता है, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे:
एसोसिएशन की बैठक में शामिल संचालकों ने सरकार से अपील की है कि वे इस संवेदनशील मुद्दे पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करें। यदि सरकार पुराने बिल्डिंग बायलॉज को बहाल करती है या वर्तमान नियमों में कुछ व्यावहारिक ढील देती है, तो इस संकट को टाला जा सकता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और शिक्षा जगत से जुड़ी ऐसी ही महत्वपूर्ण खबरों, विश्लेषणों और अध्ययन सामग्री के लिए आप Patamde Study पर विजिट कर सकते हैं। हम आपको परीक्षाओं से जुड़े हर छोटे-बड़े अपडेट और बेहतरीन तैयारी रणनीतियों से लगातार अवगत कराते रहते हैं।


