Apps and sites we build and maintain alongside this one.
Automated video production and channel management tools.
Track, issue, and manage books with a simple mobile app.
Score and review handwritten answer sheets on the go.
A study companion app built for students.
Read the latest blogs and news updates.
Create presentations quickly for online classes.

जयपुर के गोपालपुरा बाईपास क्षेत्र में संचालित कोचिंग संस्थानों की मनमानी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर अब पूरी तरह से लगाम कसने की तैयारी हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के सख्त निर्देशों के बाद जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA), नगर निगम और राजस्थान आवासन मंडल (Housing Board) ने मिलकर एक बड़ा कदम उठाया है। गोपालपुरा बाईपास की अवैध और असुरक्षित कोचिंग्स की वैधता की जांच के लिए अब एक संयुक्त अभियान चलाया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण विषय पर Patamde Study ने पहले भी अपने लेख Supreme Court Jaipur Coaching Hub Master Plan Violations में विस्तार से चर्चा की थी। अब इस मामले में जमीनी स्तर पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है, जिससे जयपुर के कोचिंग सेक्टर में हड़कंप मचा हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए हाल ही में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) मुख्यालय में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जयपुर के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया और अवैध रूप से चल रहे कोचिंग संस्थानों के खिलाफ एक ठोस कार्ययोजना तैयार की।
इस बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित अधिकारी शामिल हुए:
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि JDA और नगर निगम की एक संयुक्त टीम गोपालपुरा बाईपास क्षेत्र का सघन सर्वे करेगी। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य नियमों के विपरीत चल रहे कोचिंग संस्थानों की पहचान करना और उन पर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई करना है।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि छात्रों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। इस संयुक्त सर्वे के तहत मुख्य रूप से तीन मानकों की कड़ाई से जांच की जाएगी। यदि कोई कोचिंग संस्थान इन मानकों पर खरा नहीं उतरता है, तो उसे तुरंत सील करने या बंद करने की कार्रवाई की जाएगी।
सर्वे के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं की जांच की जाएगी:
| जांच के मुख्य बिंदु (Survey Parameters) | मानक और आवश्यकताएं (Standards & Requirements) |
|---|---|
| भवन उपयोग की स्वीकृति | क्या कोचिंग संस्थान जिस इमारत में चल रहा है, उसके पास व्यावसायिक या शैक्षणिक उपयोग की वैध स्वीकृति (Land Use Permission) है? |
| मानकों के अनुरूप पार्किंग | क्या संस्थान के पास छात्रों और कर्मचारियों के वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग स्पेस उपलब्ध है, ताकि मुख्य सड़क पर जाम न लगे? |
| फायर विभाग की एनओसी (Fire NOC) | क्या भवन में अग्निशमन के पुख्ता इंतजाम हैं और अग्निशमन विभाग द्वारा जारी वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मौजूद है? |
प्रशासन का स्पष्ट नारा है—"नो पार्किंग, नो एनओसी तो नो कोचिंग"। यानी सुरक्षा मानकों और पार्किंग व्यवस्था के बिना किसी भी संस्थान को चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बैठक में अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन करने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ एक चरणबद्ध (Phased) कार्रवाई पर सहमति जताई है। इस योजना के तहत प्रशासन सीधे तौर पर तालाबंदी करने के बजाय कानूनी प्रक्रिया का पालन करेगा:
जयपुर में कोचिंग संस्थानों को व्यवस्थित करने और शहर के रिहायशी इलाकों को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार ने प्रताप नगर में एक आधुनिक कोचिंग हब (Coaching Hub) का निर्माण किया है। हालांकि, गोपालपुरा बाईपास से कोचिंग संस्थानों को वहां स्थानांतरित करने में कई व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं, जिसे लेकर कोचिंग संचालकों और राजस्थान आवासन मंडल (RHB) के बीच विवाद बना हुआ है।
'ऑल कोचिंग इंस्टीट्यूट महासंघ' ने सरकार से मांग की है कि उन्हें प्रताप नगर कोचिंग हब में रियायती दरों पर भूखंड या निर्मित परिसर आवंटित किए जाएं। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनीश कुमार नाडार ने आरोप लगाया है कि आवासन मंडल के अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं और कोचिंग हब की जगह को अन्य सरकारी विभागों को आवंटित किया जा रहा है, जो कि मूल योजना के खिलाफ है। महासंघ का कहना है कि छोटे और मध्यम कोचिंग संस्थानों के लिए भारी-भरकम कीमतों पर प्रॉपर्टी खरीदना संभव नहीं है, इसलिए सरकार को वहां किराए पर परिसर उपलब्ध कराने का प्रावधान भी करना चाहिए।
इस विवाद पर राजस्थान आवासन मंडल के आयुक्त अरविंद पोसवाल ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान नियमों के अनुसार कोचिंग हब में संपत्तियों को किराए (Rent) पर देने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा:
"यदि कोचिंग संचालक बड़ी संख्या में भवन या परिसर खरीदने में रुचि दिखाते हैं, तो मंडल इस पर विचार कर सकता है और नियमों के तहत रियायतें देने पर भी चर्चा की जा सकती है। लेकिन फिलहाल किराए पर परिसर देने का कोई प्रावधान नहीं है।"
इस पूरी कार्रवाई का सीधा असर जयपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों पर पड़ने वाला है। गोपालपुरा बाईपास जयपुर का एक प्रमुख कोचिंग केंटर है, जहां हर साल देश और प्रदेश के कोने-कोने से छात्र आते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, परीक्षा अपडेट्स और बेहतरीन अध्ययन रणनीतियों के लिए आप Patamde Study पर जा सकते हैं, जहां आपको हर महत्वपूर्ण परीक्षा से जुड़ी सही और सटीक जानकारी मिलती है।
सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद जयपुर प्रशासन अब किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। गोपालपुरा बाईपास पर 'नो पार्किंग, नो एनओसी' के नियम को लागू करना छात्रों की सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद जरूरी कदम है। हालांकि, प्रशासन और कोचिंग संचालकों को मिलकर प्रताप नगर कोचिंग हब के विवाद को जल्द से जल्द सुलझाना चाहिए ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और जयपुर देश के एक सुरक्षित और व्यवस्थित एजुकेशन हब के रूप में अपनी पहचान बनाए रख सके।
इस मामले से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट और राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए Patamde Study के साथ जुड़े रहें।


