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सुप्रीम कोर्ट में 3 नए जजों की नियुक्ति: कार्यरत जजों की संख्या हुई 37, जानें UPSC और Law Exams के लिए सभी महत्वपूर्ण तथ्य

Super Admin·2026-10-08·5 min read
सुप्रीम कोर्ट में 3 नए जजों की नियुक्ति: कार्यरत जजों की संख्या हुई 37, जानें UPSC और Law Exams के लिए सभी महत्वपूर्ण तथ्य

सुप्रीम कोर्ट में नए न्यायाधीशों की नियुक्ति: भारतीय न्यायपालिका में एक नया अध्याय

भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में 6 अक्टूबर 2026 का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। देश की शीर्ष अदालत यानी Supreme Court में तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के नए ब्लॉक के ऑडिटोरियम में आयोजित एक भव्य समारोह में इन जजों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। New Judges Appointment की यह पूरी प्रक्रिया भारतीय प्रशासनिक सेवा और कानून की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए Indian Polity और Current Affairs के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यदि आप UPSC Preparation या Law Exams की तैयारी कर रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए बेहद मददगार साबित होगा। इस लेख में हम इस ऐतिहासिक नियुक्ति के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं, जजों के प्रोफाइल, और प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से जरूरी तथ्यों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।


नवनियुक्त जजों का संक्षिप्त परिचय (Profile of the New Judges)

शपथ लेने वाले तीनों न्यायाधीशों का कानूनी क्षेत्र में एक लंबा, निष्पक्ष और प्रतिष्ठित करियर रहा है। इन तीनों जजों के आने से सुप्रीम कोर्ट की न्यायदान क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

1. जस्टिस सुनीता अग्रवाल (Justice Sunita Agarwal)

  • मूल हाई कोर्ट: इलाहाबाद हाई कोर्ट
  • पिछला पद: गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश
  • विशेष उपलब्धि: जस्टिस सुनीता अग्रवाल सुप्रीम कोर्ट की 13वीं महिला जज बनी हैं। वह अवध क्षेत्र से संबंध रखती हैं और उन्होंने अपनी कानून की पढ़ाई अवध यूनिवर्सिटी से पूरी की थी।

2. जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय (Justice Devendra Kumar Upadhyaya)

  • मूल हाई कोर्ट: इलाहाबाद हाई कोर्ट
  • पिछला पद: दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
  • पृष्ठभूमि: इनका जन्म उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले में हुआ था। वह लखनऊ खंडपीठ से सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाले प्रतिष्ठित न्यायाधीशों में से एक हैं।

3. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह (Justice Aparesh Kumar Singh)

  • मूल हाई कोर्ट: झारखंड हाई कोर्ट
  • पिछला पद: तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
  • पृष्ठभूमि: जस्टिस सिंह ने त्रिपुरा और तेलंगाना दोनों ही हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं।

सुप्रीम कोर्ट जजों की स्वीकृत संख्या और हालिया बदलाव

भारतीय संविधान के तहत सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या को निर्धारित करने का अंतिम अधिकार भारत की संसद के पास है। हाल ही में Supreme Court (Number of Judges) Amendment Act, 2026 के माध्यम से जजों की स्वीकृत संख्या को बढ़ाया गया है।

विवरणसंख्या
पहले स्वीकृत संख्या (CJI सहित)34
वर्तमान स्वीकृत संख्या (CJI सहित)38
वर्तमान कार्यरत जजों की संख्या37
वर्तमान रिक्त पदों की संख्या01

महत्वपूर्ण तथ्य: राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई थी। इस ऐतिहासिक संशोधन के बाद जजों के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी आई है। इन तीन नई नियुक्तियों के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में केवल एक पद खाली रह गया है।

जजों की संख्या में वृद्धि का इतिहास (History of SC Judges Strength)

संविधान के लागू होने के समय (1950 में) सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के अलावा केवल 7 अन्य न्यायाधीश थे। समय के साथ मुकदमों की बढ़ती संख्या को देखते हुए संसद ने अधिनियमों में संशोधन करके जजों की संख्या बढ़ाई है:

  • 1956: 10 न्यायाधीश
  • 1960: 13 न्यायाधीश
  • 1977: 17 न्यायाधीश
  • 1986: 25 न्यायाधीश
  • 2009: 30 न्यायाधीश
  • 2019: 33 न्यायाधीश
  • 2026: 37 न्यायाधीश (CJI को मिलाकर कुल स्वीकृत संख्या 38)

कॉलेजियम प्रणाली और नियुक्ति की प्रक्रिया (Collegium System)

भारत में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति कॉलेजियम प्रणाली (Collegium System) के माध्यम से की जाती है। यह प्रणाली यूपीएससी और विभिन्न लॉ परीक्षाओं के लिए सबसे पसंदीदा टॉपिक्स में से एक है।

  1. कॉलेजियम की संरचना: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) करते हैं और इसमें कोर्ट के चार अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।
  2. सिफारिश और नियुक्ति: कॉलेजियम जजों के नामों की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजता है। केंद्रीय कानून मंत्रालय इन नामों की समीक्षा करने के बाद इन्हें राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजता है।
  3. अधिसूचना: राष्ट्रपति की अंतिम सहमति मिलने के बाद सरकार के कानून मंत्रालय द्वारा आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाती है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने हाल ही में इसकी घोषणा की थी।

भारतीय न्यायपालिका में महिलाओं का प्रतिनिधित्व (Women Representation)

जस्टिस सुनीता अग्रवाल की नियुक्ति के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या बढ़कर अब तीन हो गई है। यद्यपि यह न्यायपालिका में लैंगिक विविधता की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने अभी भी महिला जजों की कम संख्या पर चिंता व्यक्त की है।

वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत महिला न्यायाधीशों की सूची इस प्रकार है:

  • जस्टिस बी. वी. नागरत्ना: 31 अगस्त 2021 से शीर्ष अदालत में कार्यरत हैं।
  • जस्टिस वी. मोहना: इन्हें जून 2026 में सीधे बार (वरिष्ठ अधिवक्ता) से पदोन्नत कर नियुक्त किया गया था।
  • जस्टिस सुनीता अग्रवाल: 6 अक्टूबर 2026 को इन्होंने शपथ ली और सुप्रीम कोर्ट की 13वीं महिला जज बनीं।

UPSC और Law Exams के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Syllabus-Specific Key Facts)

यदि आप Patamde Study (https://patamde.in) के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो भारतीय राजव्यवस्था (Indian Polity) के इन संवैधानिक प्रावधानों को हमेशा याद रखें:

  • संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति देश के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  • योग्यताएं: सुप्रीम कोर्ट का जज बनने के लिए व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिए। इसके अलावा, वह कम से कम 5 वर्ष तक किसी हाई कोर्ट का जज रहा हो, या कम से कम 10 वर्ष तक हाई कोर्ट में वकील रहा हो, या राष्ट्रपति की राय में एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता हो।
  • कार्यकाल और सेवानिवृत्ति: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक अपने पद पर बने रहते हैं।
  • शपथ: संविधान की तीसरी अनुसूची के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जजों को भारत के मुख्य न्यायाधीश या राष्ट्रपति द्वारा इस कार्य के लिए विशेष रूप से नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष शपथ लेनी होती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

सुप्रीम कोर्ट में इन तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से देश की सर्वोच्च अदालत की कार्यक्षमता में काफी सुधार होगा और लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने में सहायता मिलेगी। 38 की स्वीकृत संख्या में से 37 पदों का भरा होना यह दर्शाता है कि न्यायपालिका और कार्यपालिका मिलकर न्यायिक सुधारों के लिए प्रतिबद्ध हैं।

करंट अफेयर्स, लॉ एग्जाम्स और भारतीय राजव्यवस्था से जुड़े ऐसे ही महत्वपूर्ण अपडेट्स और विस्तृत अध्ययन सामग्री के लिए Patamde Study पर नियमित रूप से विजिट करते रहें। हमारी टेस्ट सीरीज़ और गाइड बुक्स की मदद से आप अपनी UPSC Preparation की राह को और भी आसान बना सकते हैं।

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