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जयपुर में राजस्थान विश्वविद्यालय (Rajasthan University) परिसर से शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले 15 दिनों से राजस्थान छात्रसंघ चुनाव बहाली और राजस्थानी भाषा को मान्यता देने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता शुभम रेवाड़ (Shubham Rewar) ने आखिरकार अपना अनशन समाप्त कर दिया है। इस आंदोलन ने न केवल राजस्थान के छात्र समुदाय को आंदोलित किया, बल्कि राज्य की सियासत में भी भारी हलचल पैदा कर दी।
बुधवार शाम को SMS Hospital (सवाई मानसिंह अस्पताल) में भर्ती शुभम रेवाड़ को Congress के प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने जूस पिलाकर उनका अनशन खत्म करवाया। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी अस्पताल पहुंचकर शुभम से मुलाकात की थी और उनसे अनशन समाप्त करने की भावुक अपील की थी। इस लेख में हम शुभम रेवाड़ के इस ऐतिहासिक अनशन, छात्रों की प्रमुख मांगों और इस पूरे घटनाक्रम के राजनीतिक व सामाजिक प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।
राजस्थान विश्वविद्यालय के LL.M द्वितीय वर्ष के छात्र शुभम रेवाड़ ने छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और अपनी मातृभाषा के सम्मान के लिए इस कठिन आंदोलन की शुरुआत की थी। उनके शुभम रेवाड़ अनशन के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी मांगें थीं, जिन पर वे अड़े हुए थे:
शुभम रेवाड़ ने अपना अनिश्चितकालीन अनशन 23 जुलाई को राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के बाहर एक टेंट लगाकर शुरू किया था। धीरे-धीरे इस आंदोलन को प्रदेश भर के छात्रों और विभिन्न युवा संगठनों का भारी समर्थन मिलने लगा।
लगातार भूख हड़ताल के कारण शुभम की तबीयत लगातार बिगड़ने लगी। अनशन के 8वें दिन (30 जुलाई) को उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन ने जबरन कार्रवाई की और उन्हें वहां से उठाकर SMS Hospital के ICU में भर्ती करा दिया। अस्पताल के बेड से भी शुभम ने ड्रिप लेने से इनकार कर दिया और लिखित में दिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, उनका अनशन जारी रहेगा।
नीचे दी गई तालिका में इस आंदोलन के प्रमुख घटनाक्रमों को दर्शाया गया है:
| दिन और तिथि | मुख्य घटनाक्रम और स्थिति |
|---|---|
| 23 जुलाई | शुभम रेवाड़ द्वारा राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन अनशन की शुरुआत। |
| 30 जुलाई (8वां दिन) | तबीयत अत्यधिक बिगड़ने पर पुलिस प्रशासन द्वारा जबरन SMS Hospital में भर्ती कराना। |
| 04 अगस्त (13वां दिन) | ICU में हालत बेहद नाजुक होना; डॉक्टरों द्वारा ऑर्गन फेलियर (organ failure) की चेतावनी देना। |
| 05 अगस्त (15वां दिन) | पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मुलाकात, प्रशासन का लिखित आश्वासन और अनशन की समाप्ति। |
शुभम रेवाड़ के इस कड़े संघर्ष ने राजस्थान की राजनीति के शीर्ष नेतृत्व को झकझोर कर रख दिया। बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद SMS Hospital पहुंचे। उन्होंने शुभम के स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त की और पानी पीने की समझाइश की।
गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और मीडिया के माध्यम से राज्य की BJP सरकार (भजनलाल शर्मा सरकार) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
"जब पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद आठ साल बाद छात्रसंघ चुनाव कराए जा सकते हैं, तो राजस्थान में क्यों नहीं? राज्य सरकार को Gen Z की ताकत को समझना चाहिए और छात्रों के साथ तुरंत संवाद स्थापित करना चाहिए।"
इसके बाद बुधवार शाम को Congress के प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अस्पताल पहुंचकर शुभम को जूस पिलाया और उनका 15 दिनों से चला आ रहा अनशन समाप्त करवाया। दोनों नेताओं ने छात्रों को आश्वस्त किया कि Congress पार्टी राजस्थान छात्रसंघ चुनाव बहाली की इस मांग में पूरी तरह से प्रदेश के नौजवानों के साथ खड़ी है।
शुभम रेवाड़ के अडिग हौसले के आगे आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। बुधवार शाम को जयपुर के District Collector संदेश नायक ने अस्पताल में शुभम से मुलाकात की और उनकी मांगों पर सरकार व विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से महत्वपूर्ण आश्वासन दिए:
शुभम रेवाड़ ने इस आश्वासन के बाद संतोष व्यक्त किया और कहा कि राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना उनके संघर्ष की पहली बड़ी जीत है, लेकिन छात्रसंघ चुनावों की बहाली के लिए उनका लोकतांत्रिक संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
भारतीय लोकतंत्र में छात्रसंघ चुनावों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। राजस्थान के कई दिग्गज नेता जैसे रघु शर्मा, महेश जोशी और राजेंद्र राठौड़ इसी छात्र राजनीति की नर्सरी से निकलकर प्रदेश और देश के नेतृत्व तक पहुंचे हैं।
छात्रसंघ चुनाव बंद होने से विश्वविद्यालयों में आम छात्रों की समस्याओं को उठाने वाला कोई मंच नहीं बचता है। यही कारण है कि राजस्थान छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग केवल जयपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे राजस्थान के युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के भविष्य से जुड़ी एक बेहद लोकप्रिय मांग बन चुकी है।
शुभम रेवाड़ का 15 दिनों का यह कठिन अनशन और संघर्ष इस बात का प्रमाण है कि जब युवा अपने अधिकारों के लिए एकजुट होते हैं, तो सत्ता और प्रशासन को उनकी आवाज सुननी ही पड़ती है। राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना की स्वीकृति इस आंदोलन का एक स्वर्णिम परिणाम है, जिसने राजस्थान की संस्कृति और भाषा को एक नया आयाम दिया है। हालांकि, छात्रसंघ चुनाव कराने की मुख्य मांग पर अभी भी सरकार के अंतिम निर्णय का इंतजार है।
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