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राजस्थान के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने और शिक्षा के स्तर को सुधारने के उद्देश्य से शुरू की गई Vidya Sambal Yojana (विद्या संबल योजना) वर्तमान में प्रशासनिक लापरवाही और नियमों के फेर में उलझ कर रह गई है [image.png]. Rajasthan Education Department (राजस्थान शिक्षा विभाग) की सुस्ती के कारण जहां एक तरफ शहरी क्षेत्रों में Guest Faculty Recruitment (गेस्ट फैकल्टी भर्ती) के आदेश लंबे समय से अटके हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में जिन शिक्षकों को नियुक्त किया गया था, वे अपने Teacher Honorarium (मानदेय) के लिए तरस रहे हैं [image.png].
यह स्थिति न केवल राजस्थान के बेरोजगार युवाओं के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है, बल्कि सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे लाखों छात्र-छात्राओं की पढ़ाई को भी प्रभावित कर रही है [image.png]. इस लेख के माध्यम से हम इस योजना की वर्तमान स्थिति, विभाग की लापरवाही, मानदेय संकट और बेरोजगार संगठनों की मांगों पर विस्तार से चर्चा करेंगे [image.png].
विद्या संबल योजना के तहत अस्थाई रूप से रिक्त पदों पर शिक्षकों को लगाने की प्रक्रिया शुरू से ही विवादों और असमंजस में घिरी रही है [image.png]. अगस्त महीने में जब विभाग ने इस योजना के तहत शिक्षकों को लगाने के आदेश जारी किए, तो शुरुआत में नियमों की स्पष्टता न होने के कारण बेरोजगार युवा काफी परेशान रहे [image.png].
स्कूल संचालकों और प्राचार्यों को यह स्पष्ट जानकारी ही नहीं थी कि उन्हें किन-किन रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति करनी है [image.png]. अलग-अलग जिलों से अलग-अलग और विरोधाभासी दिशा-निर्देश जारी होने के कारण पूरे प्रदेश में गफलत की स्थिति बनी रही [image.png]. बाद में विभाग ने स्पष्टीकरण जारी कर बताया कि केवल व्याख्याता (Lecturer) के रिक्त पदों पर ही गेस्ट फैकल्टी के रूप में नियुक्तियां की जाएंगी [image.png].
इस योजना में सबसे बड़ा पेंच सितंबर माह में आया, जब राजस्थान में निकाय चुनाव की आचार संहिता लागू की गई [image.png]. इस आचार संहिता का हवाला देते हुए Rajasthan Education Department ने केवल ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में ही गेस्ट फैकल्टी लगाने के आदेश जारी किए और शहरी क्षेत्रों के स्कूलों को इस भर्ती प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर रख दिया [image.png].
वर्तमान में स्थिति यह है:
ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना के तहत प्रक्रिया को समय पर पूरा करने की कोशिश की गई थी [image.png]. विभाग द्वारा जारी की गई समय-सारणी के अनुसार सितंबर माह में नियुक्तियों की प्रक्रिया इस प्रकार पूरी की गई थी [image.png]:
| तिथि / समयावधि | चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरण [image.png] |
|---|---|
| 1 से 7 सितंबर | अभ्यर्थियों से आवेदन पत्र प्राप्त करना |
| 8 सितंबर | प्राप्त आवेदनों की सूची तैयार करना |
| 9 व 10 सितंबर | दस्तावेजों की जांच और अस्थाई वरीयता सूची का प्रकाशन |
| 11 सितंबर | अंतिम चयन सूची (Final Merit List) तैयार करना |
| 15 सितंबर तक | जिला स्तरीय समिति के अनुमोदन के बाद अंतिम नियुक्ति आदेश जारी करना |
इस समय-सारणी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में व्याख्याताओं को कार्यभार तो संभला दिया गया, लेकिन उनकी वास्तविक समस्याएं नियुक्ति के बाद शुरू हुईं [image.png].
ग्रामीण क्षेत्रों में जिन बेरोजगार युवाओं को व्याख्याता के पद पर नियुक्ति मिली, उन्हें उम्मीद थी कि इस नौकरी से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा [image.png]. लेकिन विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण उन्हें अब तक एक रुपये का भी Teacher Honorarium (मानदेय) नहीं मिला है [image.png].
योजना के तहत मानदेय के प्रावधान: विद्या संबल योजना के तहत नियुक्त व्याख्याता (Lecturer) को प्रति घंटे ₹400 का मानदेय देने का प्रावधान है, जिसके तहत अधिकतम मासिक मानदेय ₹30,000 निर्धारित किया गया है [image.png].
सितंबर मध्य से लगातार सेवाएं दे रहे ये शिक्षक अब आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं [image.png]. विशेष रूप से दीपावली जैसे बड़े त्योहार के अवसर पर भी मानदेय का भुगतान न होने से इन शिक्षकों में गहरा रोष व्याप्त है [image.png]. शिक्षकों का कहना है कि बिना मानदेय के उनके लिए घर चलाना और त्योहार मनाना बेहद मुश्किल हो गया है [image.png].
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजस्थान के विभिन्न बेरोजगार संगठनों ने सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है [image.png]. संगठनों का कहना है कि सरकार को अस्थाई योजनाओं के बजाय नियमित भर्तियों पर ध्यान देना चाहिए [image.png].
विद्या संबल योजना का मुख्य उद्देश्य अस्थाई तौर पर ही सही, लेकिन स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को सुचारू बनाना था [image.png]. परंतु प्रशासनिक ढुलमुल रवैये और समय पर मानदेय न मिलने के कारण यह योजना खुद विवादों के घेरे में आ गई है [image.png]. सरकार को चाहिए कि वह शहरी क्षेत्रों के लिए भी तुरंत Vidya Sambal Update जारी कर नियुक्तियों का मार्ग प्रशस्त करे और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों के मानदेय का तुरंत भुगतान करे [image.png].
यदि आप भी राजस्थान में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे हैं और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे REET, 1st Grade, या 2nd Grade की तैयारी कर रहे हैं, तो आपको अपनी तैयारी को मजबूत और व्यवस्थित रखना होगा. अपनी तैयारी को परखने और बेहतरीन प्रदर्शन के लिए आप Patamde mock tests and study material का उपयोग कर सकते हैं, जहां आपको नवीनतम सिलेबस के अनुसार मॉक टेस्ट और ई-बुक्स मिलेंगी.


