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राजस्थान ट्रांसपोर्ट वाउचर योजना: अब शिक्षक घर-घर जाकर करेंगे दूरी का सत्यापन, जानें नए नियम और पात्रता दरें

Pawan Joshee·2026-08-05·6 min read
राजस्थान ट्रांसपोर्ट वाउचर योजना: अब शिक्षक घर-घर जाकर करेंगे दूरी का सत्यापन, जानें नए नियम और पात्रता दरें

ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों, विशेषकर बालिकाओं के लिए स्कूल की दूरी हमेशा से एक बड़ी बाधा रही है। कई बार गाँव से स्कूल दूर होने के कारण माता-पिता अपनी बेटियों को आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल नहीं भेज पाते हैं। इसी समस्या को दूर करने और ग्रामीण क्षेत्रों में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा Transport Voucher Scheme (ट्रांसपोर्ट वाउचर योजना) और Free Bicycle Distribution Scheme (निःशुल्क साइकिल वितरण योजना) जैसी महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं।

इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं का स्कूल में नामांकन (Enrollment) बढ़ाना और उनके ठहराव (Retention) को सुनिश्चित करना है। हाल ही में इस योजना के सुचारू संचालन और पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब विद्यार्थियों के घर से स्कूल की वास्तविक दूरी का पता लगाने और उसे सत्यापित करने की जिम्मेदारी स्कूल के शिक्षकों को सौंपी गई है। इस लेख में हम इस नई व्यवस्था, पात्रता नियमों और मिलने वाली सहायता राशि के बारे में विस्तार से जानेंगे।


Transport Voucher Scheme क्या है और इसका उद्देश्य?

Transport Voucher Scheme राजस्थान सरकार की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के राजकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले उन विद्यार्थियों को यात्रा भत्ता (Travel Allowance) दिया जाता है, जिनके घर से स्कूल की दूरी अधिक है। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य गरीब और ग्रामीण परिवेश से आने वाले बच्चों को बिना किसी आर्थिक तंगी के स्कूल पहुंचने में मदद करना है।

अक्सर देखा गया है कि प्राथमिक विद्यालय तो गाँवों में आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, लेकिन उच्च प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को दूसरे गाँवों या कस्बों में जाना पड़ता है। इस दूरी को तय करने में आने वाले खर्च के कारण कई बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं। इस योजना के माध्यम से सरकार विद्यार्थियों को उनके स्कूल में उपस्थिति के दिनों के आधार पर दैनिक यात्रा भत्ता प्रदान करती है, जिससे उनके माता-पिता पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।


शिक्षकों को मिली बड़ी जिम्मेदारी: घर-घर जाकर करेंगे दूरी का सत्यापन

इस योजना के तहत मिलने वाले लाभ में पारदर्शिता लाने और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब स्कूल में बैठकर केवल अनुमान के आधार पर दूरी दर्ज करने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।

  • घर-घर जाकर सत्यापन: अब कक्षा अध्यापकों (Class Teachers) को स्वयं छात्र-छात्राओं के घर-घर जाकर उनके निवास स्थान से स्कूल तक की वास्तविक दूरी का भौतिक सत्यापन करना होगा।
  • Shala Darpan Portal पर प्रविष्टि: सत्यापन के बाद दूरी का सटीक विवरण Shala Darpan Portal पर ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा। इसी दूरी के आधार पर ही विद्यार्थियों को Transport Voucher Scheme का लाभ मिलेगा।
  • संस्था प्रधान की जिम्मेदारी: यदि किसी विद्यालय में बिना भौतिक सत्यापन के गलत दूरी दर्ज की जाती है या किसी अपात्र विद्यार्थी को योजना का लाभ दिया जाता है, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित संस्था प्रधान (School Head/Principal) को जिम्मेदार माना जाएगा और उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

Samagra Shiksha के अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (ADPC) श्रीकृष्ण विश्नोई के अनुसार, विद्यार्थियों के निवास स्थान से स्कूल की दूरी मापने की पूरी जिम्मेदारी कक्षा अध्यापक की होगी और इसके बाद ही इसे पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा।


दूरी और पात्रता के आधार पर यात्रा भत्ता की दरें

Transport Voucher Scheme के तहत विद्यार्थियों को उनकी कक्षा और स्कूल की दूरी के आधार पर अलग-अलग सहायता राशि दी जाती है। यह राशि एकमुश्त (Lump sum) नहीं दी जाती, बल्कि विद्यार्थी की स्कूल में दर्ज वास्तविक उपस्थिति (Attendance) के दिनों के आधार पर सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है।

नीचे दी गई तालिका में कक्षा-वार पात्रता और मिलने वाली सहायता राशि का विवरण दिया गया है:

कक्षा वर्ग (Class Group)दूरी की पात्रता (Distance Criteria)सहायता राशि (प्रति उपस्थिति दिवस)मुख्य शर्तें व पात्रता नियम
कक्षा 1 से 5निवास स्थान से 1 किलोमीटर से अधिक₹10ग्रामीण क्षेत्रों के ऐसे विद्यार्थी जिनके निवास स्थान की परिधि में प्राथमिक विद्यालय उपलब्ध नहीं है।
कक्षा 6 से 8निवास स्थान से 3 किलोमीटर से अधिक₹15ग्रामीण क्षेत्रों के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थी।
कक्षा 9 और 10निवास स्थान से 5 किलोमीटर से अधिक₹20राजकीय माध्यमिक, उच्च माध्यमिक और स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाली केवल बालिकाएं।

मुख्य बिंदु: यह यात्रा भत्ता केवल उन्हीं दिनों के लिए देय होगा जिन दिनों विद्यार्थी स्कूल में उपस्थित रहेगा। यदि कोई विद्यार्थी किसी दिन अनुपस्थित रहता है, तो उस दिन का भत्ता नहीं दिया जाएगा।


साइकिल या ट्रांसपोर्ट वाउचर: केवल एक ही योजना का मिलेगा लाभ

सरकार द्वारा बालिकाओं की शिक्षा को सुगम बनाने के लिए दो बेहतरीन योजनाएं चलाई जा रही हैं - Free Bicycle Distribution Scheme और Transport Voucher Scheme। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी छात्रा इन दोनों योजनाओं का लाभ एक साथ नहीं ले सकती है।

विशेष रूप से कक्षा 9 की बालिकाओं के लिए यह नियम बेहद महत्वपूर्ण है:

  1. एक योजना का चयन: कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाली छात्राओं को इन दोनों में से किसी एक ही योजना का चयन करना होगा।
  2. साइकिल मिलने पर वाउचर नहीं: जिन छात्राओं को सरकार की तरफ से निःशुल्क साइकिल वितरित की जा चुकी है, वे Transport Voucher Scheme के तहत यात्रा भत्ता प्राप्त करने के लिए पात्र नहीं होंगी।
  3. उपस्थिति आधारित भुगतान: ट्रांसपोर्ट वाउचर का लाभ लेने वाली छात्राओं को उनकी दैनिक उपस्थिति के आधार पर ही भुगतान किया जाएगा, ताकि वे नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित हों।

Shala Darpan Portal पर दूरी दर्ज करने के कड़े नियम

राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों के संस्था प्रधानों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

  • वास्तविक दूरी का अंकन: शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे गूगल मैप या वास्तविक मार्ग के आधार पर सटीक दूरी का ही अंकन करें।
  • अपात्रों पर रोक: इस सत्यापन प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी बजट का सही उपयोग हो और केवल जरूरतमंद व पात्र विद्यार्थियों को ही इस योजना का लाभ मिले।
  • पोर्टल पर समयबद्ध अपडेट: सभी स्कूलों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपने सभी पात्र विद्यार्थियों का डेटा Shala Darpan Portal पर अपडेट करना अनिवार्य किया गया है।

ग्रामीण शिक्षा और बालिका नामांकन पर इस पहल का प्रभाव

इस योजना और इसके सख्त सत्यापन नियमों से ग्रामीण शिक्षा के स्तर में काफी सुधार होने की उम्मीद है।

  • नामांकन में वृद्धि: जब अभिभावकों को पता चलता है कि उनकी बेटियों को स्कूल भेजने का यात्रा खर्च सरकार उठा रही है, तो वे बालिकाओं को आगे की पढ़ाई के लिए भेजने में संकोच नहीं करते।
  • ड्राप-आउट दर में कमी: कक्षा 5 और कक्षा 8 के बाद अक्सर दूरी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं। इस योजना के जरिए इस ड्राप-आउट दर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।
  • नियमितता को बढ़ावा: चूंकि सहायता राशि सीधे तौर पर स्कूल में उपस्थिति (Attendance) से जुड़ी हुई है, इसलिए विद्यार्थी नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।

निष्कर्ष

राजस्थान सरकार की Transport Voucher Scheme ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने और बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। शिक्षकों द्वारा घर-घर जाकर दूरी का भौतिक सत्यापन करने के नए नियम से इस योजना में पारदर्शिता आएगी और वास्तविक जरूरतमंदों तक इसका लाभ पहुंच सकेगा।

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