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ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों, विशेषकर बालिकाओं के लिए स्कूल की दूरी हमेशा से एक बड़ी बाधा रही है। कई बार गाँव से स्कूल दूर होने के कारण माता-पिता अपनी बेटियों को आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल नहीं भेज पाते हैं। इसी समस्या को दूर करने और ग्रामीण क्षेत्रों में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा Transport Voucher Scheme (ट्रांसपोर्ट वाउचर योजना) और Free Bicycle Distribution Scheme (निःशुल्क साइकिल वितरण योजना) जैसी महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं।
इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं का स्कूल में नामांकन (Enrollment) बढ़ाना और उनके ठहराव (Retention) को सुनिश्चित करना है। हाल ही में इस योजना के सुचारू संचालन और पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब विद्यार्थियों के घर से स्कूल की वास्तविक दूरी का पता लगाने और उसे सत्यापित करने की जिम्मेदारी स्कूल के शिक्षकों को सौंपी गई है। इस लेख में हम इस नई व्यवस्था, पात्रता नियमों और मिलने वाली सहायता राशि के बारे में विस्तार से जानेंगे।
Transport Voucher Scheme राजस्थान सरकार की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के राजकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले उन विद्यार्थियों को यात्रा भत्ता (Travel Allowance) दिया जाता है, जिनके घर से स्कूल की दूरी अधिक है। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य गरीब और ग्रामीण परिवेश से आने वाले बच्चों को बिना किसी आर्थिक तंगी के स्कूल पहुंचने में मदद करना है।
अक्सर देखा गया है कि प्राथमिक विद्यालय तो गाँवों में आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, लेकिन उच्च प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को दूसरे गाँवों या कस्बों में जाना पड़ता है। इस दूरी को तय करने में आने वाले खर्च के कारण कई बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं। इस योजना के माध्यम से सरकार विद्यार्थियों को उनके स्कूल में उपस्थिति के दिनों के आधार पर दैनिक यात्रा भत्ता प्रदान करती है, जिससे उनके माता-पिता पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।
इस योजना के तहत मिलने वाले लाभ में पारदर्शिता लाने और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब स्कूल में बैठकर केवल अनुमान के आधार पर दूरी दर्ज करने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
Samagra Shiksha के अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (ADPC) श्रीकृष्ण विश्नोई के अनुसार, विद्यार्थियों के निवास स्थान से स्कूल की दूरी मापने की पूरी जिम्मेदारी कक्षा अध्यापक की होगी और इसके बाद ही इसे पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा।
Transport Voucher Scheme के तहत विद्यार्थियों को उनकी कक्षा और स्कूल की दूरी के आधार पर अलग-अलग सहायता राशि दी जाती है। यह राशि एकमुश्त (Lump sum) नहीं दी जाती, बल्कि विद्यार्थी की स्कूल में दर्ज वास्तविक उपस्थिति (Attendance) के दिनों के आधार पर सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है।
नीचे दी गई तालिका में कक्षा-वार पात्रता और मिलने वाली सहायता राशि का विवरण दिया गया है:
| कक्षा वर्ग (Class Group) | दूरी की पात्रता (Distance Criteria) | सहायता राशि (प्रति उपस्थिति दिवस) | मुख्य शर्तें व पात्रता नियम |
|---|---|---|---|
| कक्षा 1 से 5 | निवास स्थान से 1 किलोमीटर से अधिक | ₹10 | ग्रामीण क्षेत्रों के ऐसे विद्यार्थी जिनके निवास स्थान की परिधि में प्राथमिक विद्यालय उपलब्ध नहीं है। |
| कक्षा 6 से 8 | निवास स्थान से 3 किलोमीटर से अधिक | ₹15 | ग्रामीण क्षेत्रों के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थी। |
| कक्षा 9 और 10 | निवास स्थान से 5 किलोमीटर से अधिक | ₹20 | राजकीय माध्यमिक, उच्च माध्यमिक और स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाली केवल बालिकाएं। |
मुख्य बिंदु: यह यात्रा भत्ता केवल उन्हीं दिनों के लिए देय होगा जिन दिनों विद्यार्थी स्कूल में उपस्थित रहेगा। यदि कोई विद्यार्थी किसी दिन अनुपस्थित रहता है, तो उस दिन का भत्ता नहीं दिया जाएगा।
सरकार द्वारा बालिकाओं की शिक्षा को सुगम बनाने के लिए दो बेहतरीन योजनाएं चलाई जा रही हैं - Free Bicycle Distribution Scheme और Transport Voucher Scheme। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी छात्रा इन दोनों योजनाओं का लाभ एक साथ नहीं ले सकती है।
विशेष रूप से कक्षा 9 की बालिकाओं के लिए यह नियम बेहद महत्वपूर्ण है:
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों के संस्था प्रधानों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस योजना और इसके सख्त सत्यापन नियमों से ग्रामीण शिक्षा के स्तर में काफी सुधार होने की उम्मीद है।
राजस्थान सरकार की Transport Voucher Scheme ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने और बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। शिक्षकों द्वारा घर-घर जाकर दूरी का भौतिक सत्यापन करने के नए नियम से इस योजना में पारदर्शिता आएगी और वास्तविक जरूरतमंदों तक इसका लाभ पहुंच सकेगा।
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