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भारत में हर साल होने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की खबरें लाखों युवाओं के भविष्य को अधर में लटका देती हैं. इसी गंभीर समस्या से निपटने और देश के परीक्षा ढांचे को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए Nilekani Committee Exam Reforms के तहत एक क्रांतिकारी प्रस्ताव पेश किया गया है. इन्फोसिस (Infosys) के सह-संस्थापक और उच्च-स्तरीय सुधार समिति (High-Powered Task Force) के अध्यक्ष Nandan Nilekani ने पारंपरिक प्रश्नपत्रों की प्रणाली को पूरी तरह समाप्त करने का सुझाव दिया है. इस नए मॉडल के तहत देश की सभी बड़ी परीक्षाएं पूरी तरह Computer Based Test (CBT) के माध्यम से आयोजित की जाएंगी और परीक्षा के दिन ही AI Exam Paper तैयार किया जाएगा. इस तकनीक-आधारित बदलाव से पेपर लीक की समस्या पर हमेशा के लिए लगाम लगाई जा सकेगी.
देश में NEET-UG जैसी बड़ी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के मामलों के बाद छात्रों में भारी आक्रोश देखा गया था. जंतर-मंतर पर हुए बड़े छात्र प्रदर्शनों और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए एक उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया. Nandan Nilekani की अध्यक्षता में गठित इस 6-सदस्यीय समिति को परीक्षा सुरक्षा, डिजाइन और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के प्रशासनिक ढांचे में सुधार करने की जिम्मेदारी दी गई है.
समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए बहुत ही व्यवस्थित और पारदर्शी तरीका अपनाया है:
मुख्य प्रभाव: इस प्रस्तावित सुधार का सीधा असर NTA की परीक्षाएं देने वाले देश के करीब 1.2 करोड़ (12 मिलियन) से अधिक वार्षिक अभ्यर्थियों पर पड़ने वाला है, जो हर साल विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होते हैं।
Paper Leak Prevention के लिए Nandan Nilekani ने एक बेहद तार्किक और व्यावहारिक तकनीकी समाधान पेश किया है. दिल्ली में आयोजित 'Bloomberg New Economy Forum' में बोलते हुए उन्होंने पारंपरिक प्रश्नपत्रों की व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी को उजागर किया. उनका कहना है कि जब तक परीक्षा के लिए पहले से कोई एक प्रश्नपत्र (a single question paper) तैयार रहेगा, तब तक उसे चुराने और बेचने का आर्थिक लालच (economic incentive) भी बना रहेगा.
इस आर्थिक लालच को पूरी तरह खत्म करने के लिए उन्होंने निम्नलिखित रणनीति सुझाई है:
इस तकनीक के इस्तेमाल से प्रश्नपत्र को पहले से प्रिंट करने, उसे सुरक्षित तिजोरियों (vaults) में रखने और परीक्षा केंद्रों तक भौतिक रूप से ले जाने की पूरी सप्लाई चेन ही खत्म हो जाएगी, जो कि लीक का मुख्य कारण बनती है.
पेपर लीक को रोकने के लिए दूसरा सबसे बड़ा सुझाव परीक्षाओं को पूरी तरह Computer Based Test (CBT) यानी कंप्यूटर आधारित परीक्षा मोड में बदलना है. वर्तमान में NEET-UG जैसी बड़ी परीक्षाएं पेन-एंड-पेपर (ओएमआर शीट) मोड में होती हैं, जिसमें प्रश्नपत्रों की छपाई और परिवहन के दौरान सुरक्षा चूक का खतरा सबसे अधिक होता है.
हालांकि, भारत जैसे विशाल देश में सभी परीक्षाओं को ऑनलाइन या कंप्यूटर मोड पर ले जाना एक बड़ी ढांचागत (infrastructure) चुनौती है:
नीलेकणी समिति के सुझावों के आधार पर भविष्य की परीक्षा प्रणाली में होने वाले प्रमुख बदलावों को हम इस तुलनात्मक तालिका के माध्यम से समझ सकते हैं:
| विशेषता (Feature) | पारंपरिक परीक्षा प्रणाली (Traditional System) | प्रस्तावित एआई-सीबीटी प्रणाली (Proposed AI-CBT System) |
|---|---|---|
| परीक्षा का माध्यम | पेन-एंड-पेपर (OMR Sheet) आधारित | पूरी तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (Computer Based Test) |
| प्रश्नपत्र का निर्माण | परीक्षा से महीनों पहले विशेषज्ञों द्वारा तैयार | परीक्षा के दिन ही AI Exam Paper और विशाल प्रश्न बैंक से रैंडम चयन |
| वितरण का तरीका | भौतिक परिवहन (ट्रक, बैंक लॉकर, कूरियर) | सुरक्षित इंटरनेट नेटवर्क के जरिए डिजिटल एन्क्रिप्टेड वितरण |
| लीक होने का खतरा | प्रिंटिंग से लेकर परीक्षा केंद्र तक हर स्तर पर भारी जोखिम | शून्य जोखिम, क्योंकि परीक्षा से पहले कोई निश्चित पेपर अस्तित्व में ही नहीं होगा |
| सुरक्षा और पारदर्शिता | मानवीय हस्तक्षेप के कारण गड़बड़ी की आशंका | NTA Reforms और NEET Reforms के तहत अत्यधिक सुरक्षित और पारदर्शी |
NEET-UG परीक्षा में हुई धांधली के बाद पूरे देश में मचे बवाल ने सरकार को परीक्षा सुधारों के लिए विवश किया है. NEET Reforms के तहत कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) को लागू करना सबसे बड़ा कदम होगा. अभी तक NEET के ऑफलाइन होने के कारण प्रश्नपत्रों के लीक होने की खबरें अक्सर आती थीं, क्योंकि इसकी छपाई और वितरण की प्रक्रिया बहुत लंबी होती है. सीबीआई (CBI) की चार्जशीट के अनुसार, लीक हुए प्रश्नपत्रों को 25,000 रुपये से लेकर 25 लाख रुपये तक में बेचा गया था, जो साबित करता है कि इसके पीछे कितना बड़ा वित्तीय नेटवर्क काम कर रहा था.
NTA Reforms के तहत इन बदलावों का प्रभाव निम्नलिखित रूप में दिखेगा:
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नंदन नीलेकणी समिति के ये सुझाव परीक्षा प्रणाली को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक युगांतकारी कदम हैं. Paper Leak Prevention के लिए तकनीक (AI और CBT) का उपयोग करना ही एकमात्र व्यावहारिक रास्ता दिखाई देता है. हालांकि, देश के कोने-कोने तक कंप्यूटर नेटवर्क का विस्तार करना और सुरक्षित आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना एक बड़ी चुनौती होगी, लेकिन छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए यह निवेश बेहद जरूरी है.
28 अक्टूबर को आने वाली अंतिम रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार इन क्रांतिकारी बदलावों को कब और किस चरणबद्ध तरीके से लागू करती है. प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी अधिक जानकारी, स्टडी गाइड और परीक्षा रणनीतियों के लिए Patamde Study के साथ जुड़े रहें।


