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राजस्थान की राजधानी जयपुर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा और नियमों की अनदेखी को लेकर जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है। शुक्रवार को जेडीए की प्रवर्तन शाखा ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गोपालपुरा बाईपास इलाके में बेसमेंट में अवैध रूप से संचालित हो रहे चार प्रमुख कोचिंग संस्थानों को पूरी तरह से सील कर दिया। इस कार्रवाई से पूरे कोचिंग जगत और छात्र समुदाय में हड़कंप मच गया है।
जयपुर में जेडीए की कोचिंग सीलिंग कार्रवाई मुख्य रूप से सुरक्षा मानकों और भवन नियमों (Building Bylaws) के खुले उल्लंघन के कारण की गई है। पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) आनंद शर्मा ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि यह कदम सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के कड़े आदेशों की पालना में उठाया गया है। इन कोचिंग संस्थानों को पूर्व में ही जेडीए द्वारा नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई थी, लेकिन निर्देशों का पालन न करने के कारण अंततः सीलिंग की यह कठोर कार्रवाई करनी पड़ी।
जेडीए की प्रवर्तन शाखा ने गोपालपुरा बाईपास की 10-बी स्कीम में स्थित विभिन्न भूखंडों पर चल रहे बेसमेंट कोचिंग सेंटरों को निशाना बनाया। सील किए गए इन संस्थानों में देश के कुछ सबसे बड़े ब्रांड्स भी शामिल हैं, जो मेडिकल (NEET) और इंजीनियरिंग (JEE) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाते हैं।
नीचे दी गई तालिका में सील किए गए कोचिंग सेंटरों और उनके स्थानों का पूरा विवरण दिया गया है:
| कोचिंग संस्थान का नाम | स्थान / भूखंड संख्या | मुख्य उल्लंघन | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|---|
| Aakash Institute (आकाश) | प्लॉट नंबर बी-43 व बी-44ए, 10-बी स्कीम | बेसमेंट में अवैध रूप से कक्षाएं चलाना और जेडीए से आवश्यक स्वीकृति न होना | पूर्णतः सील |
| B2E Learning (बी टू ई लर्निंग) | प्लॉट नंबर 294, 10-बी स्कीम | बेसमेंट में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करना और सुरक्षा मानदंडों की अनदेखी | पूर्णतः सील |
| CLC Coaching (सीएलसी कोचिंग) | प्लॉट नंबर बी-41, 10-बी स्कीम | भवन वि नियमों (Building Bylaws) का उल्लंघन और अवैध बेसमेंट उपयोग | पूर्णतः सील |
| Unacademy (अनअकैडमी) | प्लॉट नंबर बी-35, 10-बी स्कीम | बिना जेडीए अनुमति के बेसमेंट में कोचिंग कक्षाओं का संचालन | पूर्णतः सील |
जेडीए अधिकारियों के अनुसार, इन सभी कोचिंग संस्थानों के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। मुख्य रूप से तीन बड़े नियमों का उल्लंघन यहाँ पाया गया, जिसके बाद प्रशासन को यह कदम उठाना पड़ा:
सुप्रीम कोर्ट और स्थानीय नगर निगम/जेडीए के नियमों के अनुसार, किसी भी व्यावसायिक भवन के बेसमेंट (तहखाने) का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोरेज के लिए किया जा सकता है। बेसमेंट में छात्रों को बैठाकर कक्षाएं चलाना या लाइब्रेरी का संचालन करना पूरी तरह से अवैध और जानलेवा है।
मौजूदा भवन विनियमों के अनुसार, किसी भी कोचिंग संस्थान के सुचारू और सुरक्षित संचालन के लिए भूखंड (Plot) का न्यूनतम आकार 500 वर्ग मीटर होना अनिवार्य है। लेकिन जांच में पाया गया कि ये सभी संस्थान बेहद छोटे भूखंडों (लगभग 300 वर्ग गज) पर चलाए जा रहे थे, जो कि नियमों के बिल्कुल विपरीत है।
इन संस्थानों में न तो पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था थी और न ही आपातकालीन निकास (Emergency Exit) के उचित साधन थे। इसके कारण गोपालपुरा बाईपास रोड पर हर समय जाम की स्थिति बनी रहती थी और किसी भी अनहोनी की स्थिति में छात्रों की जान को बड़ा खतरा था।
महत्वपूर्ण तथ्य: जेडीए ने इस कार्रवाई से पहले सभी संबंधित कोचिंग संचालकों को नियमानुसार नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने और कमियां सुधारने का पर्याप्त समय दिया था। लेकिन संचालकों की ओर से कोई संतोषजनक कदम नहीं उठाए जाने के बाद ही सीलिंग की यह कार्रवाई की गई।
देशभर में कोचिंग सेंटरों के बेसमेंट में होने वाले हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में बेसमेंट लाइब्रेरी में पानी भरने से हुई छात्रों की मौत के बाद से पूरे देश में बेसमेंट सुरक्षा को लेकर कड़े कानून लागू किए जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत स्थानीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना है कि:
जयपुर की 10-बी विकास समिति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर गोपालपुरा बाईपास पर चल रहे अवैध कोचिंग संस्थानों की सूची सौंपी थी। समिति का तर्क था कि हाउसिंग बोर्ड द्वारा प्रताप नगर में एक सर्वसुविधायुक्त 'कोaching Hub' बनाने के बावजूद ये संस्थान नियमों को ताक पर रखकर रिहायशी और संकरी व्यावसायिक पट्टियों में अवैध रूप से काम कर रहे हैं। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने जेडीए से तीन हफ्ते के भीतर सुधारात्मक कदमों पर रिपोर्ट मांगी थी, जिसके बाद जेडीए ने यह त्वरित कार्रवाई की है।
जेडीए की इस सख्त कार्रवाई के विरोध में स्थानीय कोचिंग संचालकों और एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपनाया है। राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट एसोसिएशन के आह्वान पर गोपालपुरा बाईपास के 200 से अधिक कोचिंग संस्थानों, पुस्तकालयों और स्टडी हॉलों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल भी रखी।
कोचिंग संचालकों का तर्क है कि जेडीए ने खुद वर्ष 2021 और 2022 में इस 160 फीट चौड़े मार्ग को कोचिंग गतिविधियों के लिए अधिसूचित किया था। अचानक इस तरह की सीलिंग और खाली करने के नोटिस से न केवल उनके व्यवसाय को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि हजारों छात्रों का भविष्य भी अधर में लटक गया है। हालांकि, जेडीए प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि छात्रों की सुरक्षा और जीवन से समझौता करके किसी भी व्यावसायिक गतिविधि को अनुमति नहीं दी जा सकती।
इस सीलिंग कार्रवाई का सबसे सीधा असर उन हजारों छात्रों पर पड़ा है जो इन संस्थानों में नीट (NEET) और जेईई (JEE) जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। बीच सत्र में संस्थान सील होने से उनकी पढ़ाई में व्यवधान आना स्वाभाविक है।
ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि:
इस तरह की आपातकालीन स्थितियों में आप अपनी पढ़ाई को सुचारू रखने के लिए ऑनलाइन माध्यमों का सहारा ले सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की सही रणनीति, स्टडी गाइड और नवीनतम अपडेट्स के लिए आप Patamde Study की मदद ले सकते हैं। Patamde Study छात्रों को बिना किसी रुकावट के घर बैठे गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और परीक्षा रणनीतियां प्रदान करता है ताकि आपकी तैयारी कभी प्रभावित न हो।
जयपुर के गोपालपुरा बाईपास पर जेडीए की यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब छात्रों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। शिक्षा को व्यापार बनाने की होड़ में सुरक्षा मानकों को भूल जाना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
यद्यपि इस कार्रवाई से तात्कालिक रूप से छात्रों को थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह कदम उनके जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक था। कोचिंग संचालकों को भी अब यह समझना होगा कि उन्हें अपनी व्यवस्थाओं को नियमों के दायरे में लाना ही होगा। जब तक सभी संस्थान पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए डिजिटल और ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म्स का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए।


