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जयपुर का Gopalpura Bypass इलाका लंबे समय से राजस्थान के सबसे बड़े एजुकेशनल कॉरिडोर के रूप में जाना जाता रहा है। लेकिन हाल ही में Supreme Court के एक कड़े आदेश ने यहाँ संचालित हो रहे कोचिंग संस्थानों की नींद उड़ा दी है। जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और नगर निगम की ओर से बाईपास पर चल रहे लगभग 116 कोचिंग संस्थानों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इसके बाद से ही पूरे कोचिंग जगत में हड़कंप मचा हुआ है और इन संस्थानों पर सीलिंग और जब्ती की तलवार लटक रही है।
लेकिन इस पूरी कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि यदि ये कोचिंग संस्थान यहाँ से हटाए जाते हैं, तो ये जाएंगे कहाँ? जिस Pratap Nagar Coaching Hub को शहर के बिखरे हुए कोचिंग संस्थानों को एक छत के नीचे लाने के लिए विकसित किया गया था, अब उसके टावर दूसरे सरकारी विभागों को सौंपे जा रहे हैं। ऐसे में कोचिंग संचालकों और यहाँ पढ़ रहे हजारों छात्रों के सामने एक गंभीर वैकल्पिक संकट खड़ा हो गया है।
यह पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट में चल रहे Loknathan Case (लोकनाथन मामला) से जुड़ा हुआ है। स्थानीय नागरिक विकास समितियों और निवासियों ने कोर्ट में याचिका दायर कर शिकायत की थी कि गोपालपुरा बाईपास पर चल रहे अवैध कोचिंग संस्थानों के कारण स्थानीय लोगों का जीना दूभर हो गया है। संकरी सड़कों पर बेतरतीब पार्किंग, ट्रैफिक जाम और बिना एनओसी (NOC) के चल रहे पीजी (PG) व हॉस्टल्स ने सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह खतरे में डाल दिया है।
इस याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जेडीए को तीन हफ्ते के भीतर सुधारात्मक कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। इसी आदेश के अनुपालन में जेडीए और नगर निगम की टीमों ने गोपालपुरा बाईपास पर एक बड़ा संयुक्त सर्वे अभियान चलाया।
सरकारी नियमों और टाउन प्लानर्स के अनुसार, गोपालपुरा बाईपास पर चल रहे अधिकांश कोचिंग संस्थान नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। Building Regulations 2020 और Building Regulations 2025 के तहत कोचिंग संस्थानों के संचालन के लिए सख्त नियम तय किए गए हैं।
इसके विपरीत, गोपालपुरा बाईपास पर स्थिति यह है कि मात्र 200 से 300 वर्ग मीटर के भूखंडों पर बनी इमारतों में 500 से अधिक छात्र एक साथ पढ़ रहे हैं। कई इमारतों को व्यावसायिक दुकानों के रूप में स्वीकृत कराया गया था, लेकिन बाद में बिना किसी अनुमति के उन्हें कोचिंग क्लास और हॉस्टल में तब्दील कर दिया गया।
गोपालपुरा बाईपास की इस अव्यवस्था को समाप्त करने के लिए राजस्थान आवासन मंडल (Rajasthan Housing Board) ने प्रताप नगर के सेक्टर 16 में एक अत्याधुनिक Coaching Hub का निर्माण किया था। इस प्रोजेक्ट पर सरकार ने लगभग ₹350 करोड़ खर्च किए ताकि कोचिंग संस्थानों को एक सुरक्षित, प्रदूषण मुक्त और व्यवस्थित परिसर दिया जा सके।
मुख्य उद्देश्य: शहर की व्यस्त और अनियोजित सड़कों से कोचिंग संस्थानों को हटाकर एक ही स्थान पर सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ शिफ्ट करना।
हालांकि, करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी यह प्रोजेक्ट अपने मूल उद्देश्य को पूरा करने में विफल दिखाई दे रहा है। वर्तमान में इस विशाल कोचिंग हब में महज 14 कोचिंग संस्थान ही संचालित हो रहे हैं। इन मुट्ठी भर संस्थानों को अलग-अलग टावरों में केवल दो से चार मंजिलों पर जगह मिली हुई है, जिससे पूरा परिसर खाली और वीरान नजर आता है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब एक तरफ तो गोपालपुरा बाईपास से कोचिंग संस्थानों को हटाने की तैयारी चल रही है, और दूसरी तरफ कोचिंग हब की खाली पड़ी इमारतों को दूसरे सरकारी विभागों को आवंटित किया जा रहा है।
हाल ही में राजस्थान आवासन मंडल ने गृह विभाग (Home Department) को एक पत्र लिखकर कोचिंग हब के महत्वपूर्ण हिस्से सौंप दिए हैं।
कोचिंग हब में प्रशासनिक भवन के अलावा कुल आठ टावर बनाए गए हैं। इनमें से तीन प्रमुख टावर और प्रशासनिक भवन अब गृह विभाग के नियंत्रण में चले गए हैं। इस फैसले के बाद कोचिंग संचालकों के सामने वैकल्पिक स्थान का संकट और अधिक गहरा गया है। यदि आज गोपालपुरा की सभी 116 कोचिंगों को शिफ्ट होना पड़े, तो उनके लिए पर्याप्त जगह ही उपलब्ध नहीं होगी।
आखिरकार कोचिंग संस्थान इस ₹350 करोड़ के आलीशान हब में जाने से कतरा क्यों रहे हैं? इसका मुख्य कारण वित्तीय नीतियां और नियम हैं।
किराए पर जगह न मिलने और खरीदने की ऊंची लागत के कारण कोचिंग संचालकों ने इस हब में जाने से दूरी बना ली। इसी गतिरोध के चलते आज यह नौबत आई है कि आवासन मंडल को अपने टावर गृह विभाग को सौंपने पड़ रहे हैं।
दोनों स्थानों की वर्तमान परिस्थितियों को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका को देखें:
| विशेषता / मापदंड | गोपालपुरा बाईपास (Gopalpura Bypass) | प्रताप नगर कोचिंग हब (Coaching Hub) |
|---|---|---|
| नियोजन और इंफ्रास्ट्रक्चर | अनियोजित, संकरी गलियां, अत्यधिक भीड़भाड़ | पूर्णतः नियोजित, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर |
| सुरक्षा और फायर एनओसी | अत्यंत कमजोर, बेसमेंट क्लासेस, सुरक्षा का अभाव | उच्च स्तरीय सुरक्षा मानक, अनिवार्य फायर सेफ्टी उपकरण |
| पार्किंग की सुविधा | सड़कों पर अवैध पार्किंग, लगातार ट्रैफिक जाम | विशाल और समर्पित पार्किंग क्षेत्र (Dedicated Parking) |
| वित्तीय व्यवहार्यता | कम लागत, किराए पर आसानी से उपलब्धता | केवल क्रय (Purchase) का विकल्प, भारी वित्तीय निवेश की आवश्यकता |
| प्रशासनिक स्थिति | सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीलिंग का खतरा | टावरों का गृह विभाग को हस्तांतरण (स्थान की कमी का खतरा) |
सुप्रीम कोर्ट का आदेश छात्रों की सुरक्षा और शहर के व्यवस्थित विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। दिल्ली जैसे बड़े शहरों में बेसमेंट में चलने वाले कोचिंग सेंटरों में हुए हादसों ने यह साबित किया है कि सुरक्षा मानकों से समझौता जानलेवा हो सकता है। इसलिए गोपालपुरा बाईपास पर अवैध रूप से चल रहे कोचिंग संस्थानों पर लगाम कसना बेहद जरूरी है।
लेकिन इसके साथ ही प्रशासन को यह भी समझना होगा कि जयपुर देश का एक बहुत बड़ा एजुकेशनल हब है। यदि बिना किसी ठोस वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक 116 कोचिंगों को बंद कर दिया गया, तो यहाँ पढ़ रहे हजारों छात्रों की पढ़ाई बीच सत्र में बाधित हो जाएगी। आवासन मंडल, जेडीए और कोचिंग महासंघ को एक साथ बैठकर बीच का रास्ता निकालना चाहिए, ताकि नियमों का पालन भी हो सके और छात्रों का भविष्य भी सुरक्षित रहे।
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