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राजस्थान के शैक्षणिक गलियारों में इस समय संस्कृत विश्वविद्यालय पीजीडीसीए विवाद सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय (JRRSU) द्वारा आयोजित की जाने वाली पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन (PGDCA) परीक्षा एक बार फिर गंभीर अनियमितताओं और सामूहिक नकल के आरोपों के घेरे में है। इस परीक्षा के दौरान सामने आए चौंकाने वाले मामलों ने न केवल विश्वविद्यालय प्रशासन बल्कि उसके परीक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस पूरे विवाद ने उन ईमानदार छात्रों के भविष्य पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है, लेकिन लगातार सामने आ रहे इन मामलों से ऐसा प्रतीत होता है कि नियमों को ताक पर रखकर निजी स्वार्थों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस लेख में हम इस पूरे विवाद, सामूहिक नकल के मामलों, सीटों के गणित और जांच कमेटी के गठन के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
संस्कृत विश्वविद्यालय पीजीडीसीए विवाद के तहत हाल ही में दो निजी कॉलेजों में बड़े पैमाने पर सामूहिक नकल (Mass Cheating) के मामले पकड़े गए हैं। इन दोनों ही मामलों में विश्वविद्यालय की उड़नदस्ता टीमों ने रंगे हाथों नकल सामग्री और अन्य सबूत जब्त किए हैं।
गत 7 अगस्त को लालसोट के एमडी पीजी कॉलेज में PGDCA परीक्षा के दौरान बेहद आपत्तिजनक स्थिति देखने को मिली। परीक्षा केंद्र पर परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र के उत्तरों के मुद्रित (Printed) पन्ने सीधे उपलब्ध कराए जा रहे थे ताकि वे आसानी से सामूहिक नकल कर सकें।
लालसोट की घटना के ठीक पांच दिन बाद, यानी 11 अगस्त को सीकर के विश्वभारती कॉलेज में भी ऐसा ही सामूहिक नकल का मामला सामने आया।
यह पहली बार नहीं है जब संस्कृत विश्वविद्यालय का PGDCA कोर्स विवादों में आया है। इससे पहले भी इस कोर्स में निर्धारित सीटों से अधिक छात्रों को प्रवेश देने और उन्हें परीक्षा में बैठाने का एक बड़ा मामला सामने आ चुका है। आंकड़ों पर नजर डालें तो नियमों की धज्जियां उड़ाने का यह खेल पिछले कई वर्षों से लगातार चल रहा है।
| विवरण (वर्ष 2019 से 2023 के बीच) | आंकड़े |
|---|---|
| कुल संबद्ध कॉलेज (Colleges) | 21 |
| कुल आवंटित सीटें (Allotted Seats) | 960 |
| परीक्षा में बैठाए गए कुल छात्र (Students Appeared) | 1545 |
| निर्धारित क्षमता से अधिक छात्र (Excess Students) | 585 |
वर्ष 2019 से 2023 के बीच हुए इस सीट घोटाले का मामला राजस्थान विधानसभा तक भी पहुंचा था। विधानसभा में इस मुद्दे पर तीखे सवाल पूछे गए और परीक्षा विभाग की भूमिका को संदिग्ध माना गया। इसके बावजूद, वर्तमान में फिर से उसी कोर्स में सामूहिक नकल के मामले सामने आना यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी पिछली गलतियों और गड़बड़ियों से कोई सबक नहीं लिया है।
संस्कृत विश्वविद्यालय पीजीडीसीए विवाद में परीक्षा विभाग की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध नजर आ रही है। सूत्रों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, परीक्षा केंद्रों के निर्धारण और आवंटन में नियमों को पूरी तरह से दरकिनार किया गया है:
इस पूरे मामले के तूल पकड़ने और चौतरफा दबाव के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को अंततः जांच के आदेश देने पड़े हैं। हालांकि, विश्वविद्यालय के अधिकारियों के बयानों में इस मामले को लेकर स्पष्टता की कमी साफ दिखाई दे रही है।
जब इस पूरे मामले और परीक्षा विभाग की भूमिका को लेकर परीक्षा नियंत्रक शंभूकुमार झा से सवाल किया गया, तो उन्होंने सीधे तौर पर पल्ला झाड़ते हुए कहा:
"मैं विश्वविद्यालय का प्रवक्ता नहीं हूं, इसलिए मैं इस बारे में कुछ नहीं बता सकता। मेरे पास केवल परीक्षा नियंत्रक का चार्ज है।"
दूसरी ओर, संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु (कुलपति) प्रो. मदन मोहन झा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच कमेटी का गठन किया है। उन्होंने कहा:
"विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग से इस घोटाले के तार जुड़े हैं या नहीं, इसकी निष्पक्ष जांच के लिए हमने एक विशेष कमेटी बनाई है। इस कमेटी में विश्वविद्यालय से बाहर के तीन सदस्यों को शामिल किया गया है ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष रहे। इस तीन सदस्यीय कमेटी को सात दिन के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।"
इस प्रकार के विवाद न केवल विश्वविद्यालय की साख को बट्टा लगाते हैं, बल्कि उन हजारों छात्रों के मनोबल को भी तोड़ते हैं जो ईमानदारी से पढ़ाई करते हैं। जब अपात्र छात्रों को अनुचित साधनों के माध्यम से डिग्रियां और डिप्लोमा बांटे जाते हैं, तो इससे पूरी शिक्षा प्रणाली दूषित होती है।
हम Patamde Study पर हमेशा इस बात की वकालत करते हैं कि परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता और शुचिता होनी चाहिए। चाहे वह विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षाएं हों या कोई राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा, निष्पक्षता ही छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रख सकती है। यदि आप भी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और सटीक मार्गदर्शन, अध्ययन सामग्री तथा परीक्षा संबंधी नवीनतम अपडेट्स पाना चाहते हैं, तो Patamde Study पर विजिट करें और अपनी तैयारी को सही दिशा दें।
इस सात दिवसीय जांच कमेटी की रिपोर्ट में क्या निकलकर सामने आता है और क्या दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, इस पर पूरे प्रदेश के छात्रों और शिक्षाविदों की नजरें टिकी हुई हैं।


