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राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए पेपर लीक की खबरें किसी बड़े झटके से कम नहीं होती हैं। हाल ही में राजस्थान के बहुचर्चित कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) संयुक्त भर्ती परीक्षा-2020 (पुनः परीक्षा 2021) के पेपर लीक मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने इस मामले में एक और आरोपी को धर-दबोचा है, जो बेहद शातिराना तरीके से दूध सप्लाई करने की आड़ में पेपर लीक माफिया के लिए काम कर रहा था।
SOG की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि किस तरह से पेपर लीक माफियाओं ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपने पैर पसार रखे हैं। गिरफ्तार आरोपी अभ्यर्थियों को बहला-फुसलाकर उनके साथ लाखों रुपये का सौदा करता था और परीक्षा से ठीक पहले उन्हें किराए के मकान में ले जाकर लीक हुआ प्रश्न-पत्र रटवाता था। आइए इस पूरे मामले, आरोपी के तौर-तरीकों और SOG की इस बड़ी कार्रवाई को विस्तार से समझते हैं।
राजस्थान में जूनियर इंजीनियर (जेईएन) भर्ती परीक्षा का इतिहास काफी विवादों से घिरा रहा है। इस परीक्षा के आयोजन और उसके बाद हुए पेपर लीक की टाइमलाइन को समझना बेहद जरूरी है:
SOG की गिरफ्त में आए आरोपी की पहचान अभिषेक खंडेलवाल के रूप में हुई है। अभिषेक मूल रूप से जसौता मेसरा, दौसा का रहने वाला है और वर्तमान में राजीव विहार कॉलोनी, मानसरोवर, जयपुर में रह रहा था।
जांच में सामने आया कि अभिषेक का मुख्य पेशा घर-घर जाकर दूध सप्लाई करना था। इस साधारण से काम की आड़ में वह एक बड़े आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा बन गया:
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) महावीर सिंह मीणा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस पूरे खेल में पैसों का बहुत बड़ा लेन-देन शामिल था।
मुख्य तथ्य: अभिषेक खंडेलवाल ने जेईएन भर्ती परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी ली थी। उसने प्रति अभ्यर्थी 14 लाख रुपये में परीक्षा से पहले लीक पेपर उपलब्ध कराने और उसे हल करवाने का सौदा भीमसिंह यादव से तय किया था।
इस सौदे को अंजाम देने के लिए अभिषेक ने जयपुर के मानसरोवर स्थित राजीव विहार कॉलोनी में भीमसिंह को एक मकान किराए पर दिलवाया। परीक्षा से ठीक पहले, अभिषेक ने कई अभ्यर्थियों को इकट्ठा किया और उन्हें इस किराए के मकान (सेफ हाउस) में ले गया। वहां अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही लीक हो चुका प्रश्न-पत्र हल करवाया गया और उनके उत्तर अच्छी तरह से रटवाए गए, ताकि वे परीक्षा में सीधे तौर पर सफल हो सकें।
इस पूरे मामले का खुलासा और आरोपी की गिरफ्तारी SOG की मुस्तैदी के कारण संभव हो पाई है। इस कार्रवाई का सुपरविजन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है:
इस पूरे मामले के मुख्य पहलुओं को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका को देखें:
| मुख्य बिंदु (Key Highlights) | विवरण (Details) |
|---|---|
| संबंधित परीक्षा | कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) संयुक्त भर्ती परीक्षा-2020 (पुनः परीक्षा 2021) |
| गिरफ्तार आरोपी | अभिषेक खंडेलवाल (निवासी: जसौता मेसरा, दौसा; हाल: मानसरोवर, जयपुर) |
| मुख्य सहयोगी/माफिया | भीमसिंह यादव (भूपेंद्र सारण गैंग का सक्रिय सदस्य) |
| सौदे की राशि | ₹14 लाख प्रति अभ्यर्थी (Per Candidate) |
| अपराध का तरीका | दूध सप्लाई की आड़ में नेटवर्क बनाना, मानसरोवर के किराए के मकान में लीक पेपर रटवाना |
| मुकदमा दर्ज होने की तिथि | जनवरी 2026 (पुनः परीक्षा पेपर लीक मामले में) |
| जांच एवं कार्रवाई टीम | एडीजी विशाल बंसल, डीआईजी भुवन भूषण यादव, एसपी कुंदन कंवरिया, एएसपी महावीर सिंह मीणा |
इस तरह के पेपर लीक के मामलों से उन लाखों अभ्यर्थियों का मनोबल टूटता है जो दिन-रात मेहनत करके सरकारी नौकरी का सपना देखते हैं। लेकिन SOG की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से यह भी साफ होता है कि देर-सवेर कानून के हाथ अपराधियों तक पहुंच ही जाते हैं।
यदि आप भी राजस्थान या देश की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो आपको इस तरह के शॉर्टकट और फर्जी दावों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। अपनी मेहनत और सही मार्गदर्शन पर भरोसा रखें। परीक्षाओं की सही रणनीति, विश्वसनीय स्टडी गाइड और परीक्षा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी प्रामाणिक खबर के लिए आप Patamde Study से जुड़ सकते हैं। Patamde Study अभ्यर्थियों को सही दिशा में तैयारी करने और अपनी मंजिल तक पहुंचने में मदद करता है।
राजस्थान में कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में अभिषेक खंडेलवाल की गिरफ्तारी SOG के लिए एक बड़ी सफलता है। दूध सप्लाई जैसे सामान्य व्यवसाय की आड़ में चल रहे इस काले कारनामे का पर्दाफाश होना यह दर्शाता है कि पेपर माफियाओं के नेटवर्क कितने गहरे हो सकते हैं। अभ्यर्थियों को चाहिए कि वे ऐसे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या प्रलोभन से बचें और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें। सरकार और जांच एजेंसियों की इस तरह की सख्त कार्रवाइयों से भविष्य में परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता बनी रहने की उम्मीद मजबूत होती है।


