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राजस्थान जेईएन भर्ती परीक्षा पेपर लीक: दूध सप्लाई की आड़ में ₹14 लाख का खेल, SOG ने आरोपी को दबोचा

Super Admin·2026-08-17·6 min read
राजस्थान जेईएन भर्ती परीक्षा पेपर लीक: दूध सप्लाई की आड़ में ₹14 लाख का खेल, SOG ने आरोपी को दबोचा

राजस्थान जेईएन भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामला: दूध सप्लाई की आड़ में ₹14 लाख का खेल, SOG ने किया बड़ा खुलासा

राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए पेपर लीक की खबरें किसी बड़े झटके से कम नहीं होती हैं। हाल ही में राजस्थान के बहुचर्चित कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) संयुक्त भर्ती परीक्षा-2020 (पुनः परीक्षा 2021) के पेपर लीक मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने इस मामले में एक और आरोपी को धर-दबोचा है, जो बेहद शातिराना तरीके से दूध सप्लाई करने की आड़ में पेपर लीक माफिया के लिए काम कर रहा था।

SOG की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि किस तरह से पेपर लीक माफियाओं ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपने पैर पसार रखे हैं। गिरफ्तार आरोपी अभ्यर्थियों को बहला-फुसलाकर उनके साथ लाखों रुपये का सौदा करता था और परीक्षा से ठीक पहले उन्हें किराए के मकान में ले जाकर लीक हुआ प्रश्न-पत्र रटवाता था। आइए इस पूरे मामले, आरोपी के तौर-तरीकों और SOG की इस बड़ी कार्रवाई को विस्तार से समझते हैं।


कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) भर्ती परीक्षा का इतिहास और विवाद

राजस्थान में जूनियर इंजीनियर (जेईएन) भर्ती परीक्षा का इतिहास काफी विवादों से घिरा रहा है। इस परीक्षा के आयोजन और उसके बाद हुए पेपर लीक की टाइमलाइन को समझना बेहद जरूरी है:

  • दिसंबर 2020 (पहली परीक्षा): कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) संयुक्त भर्ती परीक्षा-2020 का आयोजन पहली बार दिसंबर 2020 में किया गया था। लेकिन परीक्षा के तुरंत बाद पेपर लीक होने की पुष्टि हुई, जिसके कारण इस परीक्षा को रद्द करना पड़ा।
  • 12 सितंबर 2021 (पुनः परीक्षा): रद्द की गई परीक्षा को दोबारा आयोजित करने का फैसला लिया गया और 12 सितंबर 2021 को पुनः परीक्षा आयोजित की गई।
  • पुनः परीक्षा का पेपर भी लीक: SOG की जांच में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि दोबारा आयोजित की गई परीक्षा का पेपर भी माफियाओं द्वारा लीक कर दिया गया था।
  • जनवरी 2026 में मुकदमा दर्ज: जब SOG के संज्ञान में यह बात आई कि 2021 की पुनः परीक्षा का पेपर भी लीक हुआ था, तब जनवरी 2026 में इस संबंध में एक नया प्रकरण दर्ज कर गहन जांच शुरू की गई।

दूध सप्लाई की आड़ में कैसे खड़ा हुआ पेपर लीक का नेटवर्क?

SOG की गिरफ्त में आए आरोपी की पहचान अभिषेक खंडेलवाल के रूप में हुई है। अभिषेक मूल रूप से जसौता मेसरा, दौसा का रहने वाला है और वर्तमान में राजीव विहार कॉलोनी, मानसरोवर, जयपुर में रह रहा था।

जांच में सामने आया कि अभिषेक का मुख्य पेशा घर-घर जाकर दूध सप्लाई करना था। इस साधारण से काम की आड़ में वह एक बड़े आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा बन गया:

  1. पेपर माफिया से संपर्क: दूध सप्लाई के काम के दौरान ही अभिषेक का संपर्क बानसूर निवासी भीमसिंह यादव से हुआ। भीमसिंह यादव पेपर माफिया भूपेंद्र सारण गैंग का एक बेहद सक्रिय और मुख्य सदस्य था।
  2. पारिवारिक संबंध और नेटवर्क का विस्तार: भीमसिंह यादव ने जयपुर में शराब गोदामों के लोडिंग-अनलोडिंग का ठेका ले रखा था। इस काम में अभिषेक खंडेलवाल का छोटा भाई भीमसिंह के अधीन मैनेजर के रूप में काम करता था। इस नजदीकी और पारिवारिक संबंध के कारण अभिषेक और भीमसिंह के बीच भरोसा बढ़ा और उन्होंने मिलकर पेपर लीक का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया।

₹14 लाख प्रति अभ्यर्थी का सौदा और मानसरोवर का 'सेफ हाउस'

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) महावीर सिंह मीणा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस पूरे खेल में पैसों का बहुत बड़ा लेन-देन शामिल था।

मुख्य तथ्य: अभिषेक खंडेलवाल ने जेईएन भर्ती परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी ली थी। उसने प्रति अभ्यर्थी 14 लाख रुपये में परीक्षा से पहले लीक पेपर उपलब्ध कराने और उसे हल करवाने का सौदा भीमसिंह यादव से तय किया था।

इस सौदे को अंजाम देने के लिए अभिषेक ने जयपुर के मानसरोवर स्थित राजीव विहार कॉलोनी में भीमसिंह को एक मकान किराए पर दिलवाया। परीक्षा से ठीक पहले, अभिषेक ने कई अभ्यर्थियों को इकट्ठा किया और उन्हें इस किराए के मकान (सेफ हाउस) में ले गया। वहां अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही लीक हो चुका प्रश्न-पत्र हल करवाया गया और उनके उत्तर अच्छी तरह से रटवाए गए, ताकि वे परीक्षा में सीधे तौर पर सफल हो सकें।


SOG की बड़ी कार्रवाई और मुख्य अधिकारियों की भूमिका

इस पूरे मामले का खुलासा और आरोपी की गिरफ्तारी SOG की मुस्तैदी के कारण संभव हो पाई है। इस कार्रवाई का सुपरविजन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है:

  • सुपरविजन टीम: इस संवेदनशील मामले का सुपरविजन डीआईजी (DIG) भुवन भूषण यादव और एसपी (SP) कुंदन कंवरिया द्वारा किया जा रहा है।
  • एडीजी (SOG) विशाल बंसल के नेतृत्व में टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए आरोपी अभिषेक खंडेलवाल को गिरफ्तार किया।
  • इस मामले के मुख्य सूत्रधार भीमसिंह यादव को SOG द्वारा पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और उससे पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर ही अभिषेक की गिरफ्तारी संभव हो सकी है।

जेईएन भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले का संक्षिप्त विवरण

इस पूरे मामले के मुख्य पहलुओं को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका को देखें:

मुख्य बिंदु (Key Highlights)विवरण (Details)
संबंधित परीक्षाकनिष्ठ अभियंता (जेईएन) संयुक्त भर्ती परीक्षा-2020 (पुनः परीक्षा 2021)
गिरफ्तार आरोपीअभिषेक खंडेलवाल (निवासी: जसौता मेसरा, दौसा; हाल: मानसरोवर, जयपुर)
मुख्य सहयोगी/माफियाभीमसिंह यादव (भूपेंद्र सारण गैंग का सक्रिय सदस्य)
सौदे की राशि₹14 लाख प्रति अभ्यर्थी (Per Candidate)
अपराध का तरीकादूध सप्लाई की आड़ में नेटवर्क बनाना, मानसरोवर के किराए के मकान में लीक पेपर रटवाना
मुकदमा दर्ज होने की तिथिजनवरी 2026 (पुनः परीक्षा पेपर लीक मामले में)
जांच एवं कार्रवाई टीमएडीजी विशाल बंसल, डीआईजी भुवन भूषण यादव, एसपी कुंदन कंवरिया, एएसपी महावीर सिंह मीणा

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और अभ्यर्थियों के लिए संदेश

इस तरह के पेपर लीक के मामलों से उन लाखों अभ्यर्थियों का मनोबल टूटता है जो दिन-रात मेहनत करके सरकारी नौकरी का सपना देखते हैं। लेकिन SOG की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से यह भी साफ होता है कि देर-सवेर कानून के हाथ अपराधियों तक पहुंच ही जाते हैं।

यदि आप भी राजस्थान या देश की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो आपको इस तरह के शॉर्टकट और फर्जी दावों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। अपनी मेहनत और सही मार्गदर्शन पर भरोसा रखें। परीक्षाओं की सही रणनीति, विश्वसनीय स्टडी गाइड और परीक्षा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी प्रामाणिक खबर के लिए आप Patamde Study से जुड़ सकते हैं। Patamde Study अभ्यर्थियों को सही दिशा में तैयारी करने और अपनी मंजिल तक पहुंचने में मदद करता है।


निष्कर्ष

राजस्थान में कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में अभिषेक खंडेलवाल की गिरफ्तारी SOG के लिए एक बड़ी सफलता है। दूध सप्लाई जैसे सामान्य व्यवसाय की आड़ में चल रहे इस काले कारनामे का पर्दाफाश होना यह दर्शाता है कि पेपर माफियाओं के नेटवर्क कितने गहरे हो सकते हैं। अभ्यर्थियों को चाहिए कि वे ऐसे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या प्रलोभन से बचें और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें। सरकार और जांच एजेंसियों की इस तरह की सख्त कार्रवाइयों से भविष्य में परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता बनी रहने की उम्मीद मजबूत होती है।

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