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शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों ही किसी भी समाज के विकास की नींव होते हैं। यदि कोई बच्चा शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नहीं है, तो उसका सीधा असर उसकी शिक्षा और सीखने की क्षमता पर पड़ता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक बेहद सराहनीय और महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की है। इस पहल का नाम है 'नेत्र जांच अभियान'।
इस अभियान के तहत प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की आंखों की विशेष जांच की जाएगी। जांच के दौरान जिन बच्चों की नजर कमजोर पाई जाएगी, उन्हें सरकार की तरफ से बिल्कुल नि:शुल्क चश्मे वितरित किए जाएंगे। राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों पर शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धन के अभाव या जागरूकता की कमी के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि यह अभियान बच्चों के बेहतर भविष्य के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा। इस वर्ष विभाग ने लगभग 75 हजार जरूरतमंद विद्यार्थियों को नि:शुल्क चश्मे देने का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है।
"नजर ठीक तो पढ़ाई भी बेहतर" — यह केवल एक नारा नहीं है, बल्कि एक कड़वी सच्चाई है। अक्सर देखा जाता है कि कई बच्चे कक्षा में ब्लैकबोर्ड पर लिखे अक्षरों को ठीक से नहीं पढ़ पाते हैं या किताबों के छोटे अक्षरों को देखने में उन्हें कठिनाई होती है। कई बार बच्चे खुद भी इस बात को समझ नहीं पाते हैं कि उनकी नजर कमजोर है, और वे सिरदर्द या आंखों में थकान की शिकायत करने लगते हैं। धीरे-धीरे इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ता है और वे कक्षा में अन्य बच्चों से पिछड़ने लगते हैं।
इस अभियान के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
राजस्थान सरकार का यह नेत्र जांच अभियान कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि पिछले वर्ष मिली शानदार सफलता का ही अगला चरण है। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के अनुसार, पिछले वर्ष भी राज्य सरकार के विशेष प्रयासों से लाखों बच्चों की स्क्रीनिंग की गई थी, जिसमें से 71 हजार से अधिक बच्चों को नि:शुल्क चश्मे बांटे गए थे।
इस वर्ष सरकार ने अपने इस आंकड़े को और बढ़ाते हुए लगभग 75 हजार बच्चों तक पहुंचने का संकल्प लिया है। नीचे दी गई तालिका में पिछले वर्ष के परिणामों और इस वर्ष के लक्ष्यों का एक स्पष्ट तुलनात्मक विवरण दिया गया है:
| विवरण / मानक | पिछला वर्ष | इस वर्ष का लक्ष्य |
|---|---|---|
| लाभान्वित बच्चों की संख्या | 71,000+ से अधिक विद्यार्थी | लगभग 75,000 विद्यार्थी |
| मुख्य लक्षित समूह | सरकारी स्कूलों के छात्र | सरकारी स्कूलों के छात्र |
| नोडल विभाग | चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान | चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान |
| सहयोगी टीमें | RBSK (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) | RBSK और शिक्षा विभाग के शिक्षक |
| जांच का स्तर | स्कूल स्तर एवं CHC स्तर | स्कूल स्तर एवं CHC स्तर (ऑप्थैल्मिक असिस्टेंट द्वारा) |
इस अभियान को जमीनी स्तर पर पूरी तरह सफल बनाने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा शिक्षा विभाग के बीच एक मजबूत समन्वय स्थापित किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया को बेहद व्यवस्थित तरीके से डिजाइन किया गया है ताकि कोई भी जरूरतमंद बच्चा इस योजना का लाभ उठाने से वंचित न रह जाए।
इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
सबसे पहले, स्कूल स्तर पर शिक्षकों द्वारा शाला दर्पण (Shala Darpan) पोर्टल पर उपलब्ध छात्रों के डेटा के आधार पर प्रारंभिक स्क्रीनिंग की जाएगी। शिक्षक अपनी कक्षाओं में उन बच्चों की पहचान करेंगे जिन्हें ब्लैकबोर्ड देखने या पढ़ने में परेशानी होती है।
ब्लॉक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों तथा ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के समन्वय से सरकारी स्कूलों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की टीमें भेजी जा रही हैं। ये टीमें स्कूलों में जाकर चिन्हित बच्चों की प्राथमिक आंखों की जांच (Screening) करेंगी।
जिन बच्चों में प्राथमिक जांच के दौरान दृष्टि संबंधी गंभीर समस्याएं पाई जाएंगी, उन्हें आगे की जांच के लिए नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भेजा जाएगा। प्रदेश के 382 CHC पर कार्यरत ऑप्थैल्मिक असिस्टेंट (Ophthalmic Assistants) द्वारा इन बच्चों की आंखों की सटीक और वैज्ञानिक जांच की जाएगी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि CHC स्तर पर आने वाले किसी भी छात्र को बिना जांच के वापस न भेजा जाए। जांच के तुरंत बाद, जिन बच्चों को चश्मे की आवश्यकता होगी, उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार चश्मा तैयार करवाकर बिल्कुल मुफ्त दिया जाएगा।
"शिक्षा केवल किताबों को रटने का नाम नहीं है, बल्कि यह दुनिया को देखने और समझने का नजरिया है। यदि बच्चों का नजरिया यानी उनकी दृष्टि ही धुंधली होगी, तो वे ज्ञान के प्रकाश को पूरी तरह कैसे ग्रहण कर पाएंगे?"
कमजोर नजर का सीधा प्रभाव बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके आत्मविश्वास पर पड़ता है। जब एक बच्चा कक्षा में ब्लैकबोर्ड पर लिखे अक्षरों को साफ-साफ नहीं देख पाता, तो वह धीरे-धीरे हीनभावना का शिकार होने लगता है। उसे लगता है कि वह अन्य बच्चों की तुलना में कमजोर है, जबकि असल समस्या उसकी बुद्धि में नहीं बल्कि उसकी आंखों में होती है।
समय पर आंखों की जांच और चश्मा मिलने से बच्चों को निम्नलिखित लाभ होते हैं:
आज के डिजिटल युग में, जहां पढ़ाई का एक बड़ा हिस्सा ऑनलाइन क्लासेस और स्क्रीन रीडिंग पर निर्भर हो चुका है, आंखों की अतिरिक्त देखभाल करना बेहद जरूरी है। चाहे आप स्कूली छात्र हों या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हों, आपकी आंखों का स्वस्थ रहना आपकी सफलता के लिए अनिवार्य है। Patamde Study पर हम हमेशा विद्यार्थियों के समग्र विकास और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हैं।
अपनी आंखों को स्वस्थ रखने के लिए छात्र इन आसान और प्रभावी टिप्स को अपना सकते हैं:
राजस्थान सरकार का यह 'नेत्र जांच अभियान' केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह राज्य के हजारों बच्चों के सुनहरे भविष्य की नींव रख रहा है। जब देश का हर बच्चा स्पष्ट दृष्टि के साथ पढ़ेगा, तभी हमारा समाज और देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा। सरकार की इस सराहनीय पहल का लाभ हर जरूरतमंद बच्चे तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए शिक्षकों, अभिभावकों और समाज के हर नागरिक को जागरूक होने की आवश्यकता है।
यदि आप भी किसी सरकारी स्कूल के विद्यार्थी को जानते हैं जिसे देखने में परेशानी हो रही है, तो तुरंत उनके विद्यालय के शिक्षकों से संपर्क करें ताकि इस अभियान के तहत उनकी आंखों की जांच कराई जा सके।
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