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राजस्थान में कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के लिए सरकार द्वारा Rajasthan Coaching Act Rules and Registration (राजस्थान कोचिंग एक्ट नियम और रजिस्ट्रेशन) को लागू तो कर दिया गया है, लेकिन धरातल पर इसकी स्थिति विरोधाभासी नजर आ रही है। एक तरफ जहां उच्च शिक्षा विभाग ने अब तक कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण के लिए न तो आवेदन फॉर्म जारी किए हैं और न ही रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट देने की प्रक्रिया शुरू की है, वहीं दूसरी तरफ जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और नगर निगम की ओर से कोचिंग सेंटरों को नियमों के उल्लंघन के नोटिस धड़ाधड़ थमाए जा रहे हैं।
इस दोहरे रवैये के कारण जयपुर के कोचिंग संचालकों में भारी आक्रोश है। ऑल कोचिंग इंस्टीट्यूट महासंघ ने जिला प्रशासन की बैठकों का बहिष्कार कर दिया है और सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए इस पूरे घटनाक्रम को समझना बेहद जरूरी है। शिक्षा जगत की ऐसी ही महत्वपूर्ण खबरों और सटीक विश्लेषण के लिए आप Patamde Study पर भरोसा कर सकते हैं।
राजस्थान सरकार ने कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा और सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए कोचिंग एक्ट लागू किया है। नियम के अनुसार, सभी कोचिंग संस्थानों को उच्च शिक्षा विभाग के पास अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य है। लेकिन विडंबना यह है कि एक्ट लागू होने के बावजूद उच्च शिक्षा विभाग ने अब तक पंजीकरण की आवेदन प्रक्रिया ही शुरू नहीं की है।
दूसरी तरफ, जिला प्रशासन, जेडीए और नगर निगम बेहद सक्रिय नजर आ रहे हैं। जिला प्रशासन अब तक कोचिंग नियमों की पालना को लेकर चार बड़ी बैठकें कर चुका है। पंजीकरण प्रमाणपत्र (Registration Certificate) न होने के बावजूद कोचिंग संचालकों पर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है, जिससे पूरा सिस्टम आमने-सामने आ खड़ा हुआ है।
मुख्य विवाद: कोचिंग संचालकों का सवाल है कि जब सरकार ने पंजीकरण की खिड़की ही नहीं खोली है, तो वे खुद को पंजीकृत कैसे करवाएं? और बिना रजिस्ट्रेशन के उन पर एक्ट के तहत कार्रवाई किस आधार पर की जा रही है?
राजस्थान में कोचिंग संचालित करने के लिए सरकार ने बेहद कड़े मानक तय किए हैं। गोपालपुरा बाईपास और मानसरोवर जैसे प्रमुख कोचिंग हब में चल रहे अधिकांश संस्थान इन नियमों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। नए कोचिंग एक्ट के तहत निर्धारित मुख्य नियम और मानक निम्नलिखित तालिका में दिए गए हैं:
| नियम का क्षेत्र (Area of Rule) | सरकार द्वारा निर्धारित मानक (Prescribed Standards) |
|---|---|
| न्यूनतम भूखंड (Minimum Plot Area) | कोचिंग सेंटर के संचालन के लिए कम से कम 500 वर्गमीटर का भूखंड होना अनिवार्य है। |
| सड़क की चौड़ाई (Road Width) | कोचिंग संस्थान के सामने की सड़क कम से कम 18 मीटर (60 फीट) चौड़ी होनी चाहिए। |
| प्रति छात्र स्थान (Space per Student) | कक्षा के भीतर प्रति विद्यार्थी न्यूनतम 1.75 वर्गमीटर जगह होनी आवश्यक है। |
| बेसमेंट का उपयोग (Basement Classrooms) | बेसमेंट में किसी भी प्रकार के क्लासरूम (कक्षा) संचालित करने की अनुमति नहीं है। |
| सार्वजनिक सुविधाएं (Public Amenities) | कुल गणना योग्य क्षेत्रफल का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा कैंटीन, लाइब्रेरी और कॉमन टॉयलेट जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए होना चाहिए। |
| पार्किंग व्यवस्था (Parking Facility) | बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए और कुल पार्किंग का 50% हिस्सा आगंतुकों (Visitors) के लिए आरक्षित होना चाहिए। |
जयपुर का गोपालपुरा बाईपास क्षेत्र कोचिंग संस्थानों का सबसे बड़ा गढ़ माना जाता है, जहां 100 से अधिक छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान संचालित हैं। जेडीए (Jaipur Development Authority) ने हाल ही में गोपालपुरा बाईपास के 116 कोचिंग संस्थानों का एक विस्तृत सर्वे करवाया था। इस सर्वे की रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली रही, जिसमें सामने आया कि अधिकांश कोचिंग संस्थान तय मानकों को पूरा नहीं करते हैं।
इस पूरी कार्रवाई के विरोध में ऑल कोचिंग इंस्टीट्यूट महासंघ पूरी तरह से लामबंद हो गया है। महासंघ ने जयपुर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में होने वाली बैठकों का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया है। महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रशासन का यह रवैया पूरी तरह से एकतरफा और अनुचित है।
कोचिंग महासंघ ने सरकार और उच्च शिक्षा विभाग पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। महासंघ का कहना है कि कुछ खास और बड़े कोचिंग संस्थानों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को लंबित रखा जा रहा है। उनका तर्क है कि यदि पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, तो सभी संस्थानों को कड़े मानकों का पालन करना होगा। ऐसे में जो संस्थान मानकों को पूरा नहीं करते, वे पंजीकरण से बाहर हो जाएंगे। इसी स्थिति से कुछ चहेते संस्थानों को बचाने के लिए इस प्रक्रिया को लटकाया जा रहा है।
ऑल कोचिंग इंस्टीट्यूट महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनीष कुमार नाडार ने इस विसंगति पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा:
"एक तरफ कोचिंग नियमन का एक्ट लागू है, लेकिन रजिस्ट्रेशन का रास्ता अभी खुला नहीं है। दूसरी तरफ भवन, भू-उपयोग और पार्किंग के नियमों को लेकर जेडीए-निगम की कार्रवाई जारी है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि पहले पंजीकरण होगा या कार्रवाई? इन दोनों प्रक्रियाओं के बीच का कानूनी आधार आखिर क्या है?"
इस पूरे विवाद और कोचिंग संचालकों के विरोध के बीच सरकारी अधिकारियों का कहना है कि नियमों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव मुकेश शर्मा ने इस मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी।
विभाग वर्तमान में नियमों और इसके कानूनी पहलुओं पर काम कर रहा है। यह पूरी कवायद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत की जा रही है, इसलिए नियमों को बेहद पारदर्शी और मजबूत बनाया जा रहा है ताकि भविष्य में छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
Rajasthan Coaching Act Rules and Registration को लेकर चल रहा यह गतिरोध राजस्थान के शैक्षिक वातावरण को प्रभावित कर रहा है। कड़े नियम और सुरक्षा मानक छात्रों के हित में बेहद जरूरी हैं, लेकिन बिना पंजीकरण पोर्टल या फॉर्म जारी किए सीधे सीलिंग और नोटिस की कार्रवाई करना प्रशासनिक विसंगति को दर्शाता है। सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाए ताकि नियम सम्मत काम करने वाले कोचिंग संस्थानों को अनावश्यक परेशानी न हो।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले वहां की बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा मानकों की जांच अवश्य कर लें। परीक्षाओं से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर, एडमिट कार्ड अपडेट और बेहतरीन स्टडी गाइड के लिए Patamde Study के साथ जुड़े रहें।


